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अनेकता में एकता

सुरेश जजावरा ‘सुरेश सरल’
छिंदवाड़ा(मध्यप्रदेश)
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अनेक रंग अनेक रूप,
अनेक पंथ है जहां।
अनेक धर्म अनेक कर्म,
अनेक भाषा बोलियां जहां।
विविध रंगों से रंगा हुआ,
एक मेरा हिन्दुस्तां।
एक मेरा हिन्दुस्तां…॥

हैं शब्द अनेक सुर अनेक,
अनेक जाति अनेक वर्ण जहां।
है भेद-भेद से भरा हुआ,
है एक वृक्ष,अनेक पर्ण जहां।
यौवन उपवन-सा महकता,
एक मेरा हिन्दुस्तां।
एक मेरा हिन्दुस्तां…॥

विविध-विविध खान-पान,
विविध रहन-सहन जहां।
विविध-विविध त्योहार हैं,
सबके सब रिश्तेदार है जहां।
सबका खास रिश्तेदार है,
एक मेरा हिन्दुस्तां।
एक मेरा हिन्दुस्तां…॥

है अनेकता में एकता,
विविधता है ‘सरल’ जहां।
है धर्म भी विविध-विविध,
सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रधर्म जहां।
वो देश सिर्फ एक है,
एक मेरा हिन्दुस्तां।
एक मेरा हिन्दुस्तां…॥

राही सरल अनेक है,
भावना अनेक है जहां।
अनेक शेख,धनंजय,
अनेक सारिक सागर जहां।
हम सबकी आरजू मगर,
एक मेरा हिन्दुस्तां।
एक मेरा हिन्दुस्तां…॥