कुल पृष्ठ दर्शन :

हे! प्यारी चिरैया

सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
***************************************

‘विश्व गौरैया दिवस’ विशेष…

सुबह-सवेरे चहके पंछी,
घर-घर चहके जागे पंछी।

नन्हीं गौरया छत पर आई,
भोली चिड़िया चीं-चीं लाई।

हिय उल्लासित उड़ उड़ जाऊँ,
सोन-चिरैया तखती जाऊँ।

चहकी दिनभर मस्त चिरैया,
सहेज नीड़, तृण-तृण चिरैया।

झटपट अम्मा नीर ले लाई,
मुट्ठी भर बाजरा फैलाई।

आओ प्यारी चिड़िया आओ,
चुन-चुन दाना चुगने आओ।

फुदक-फुदक कर मन बहलाए,
तितर-बितर हो पर फैलाए।

चहक-चहककर चिड़िया‌ बोली,
मीठी मिसरी, आम्र डोली।

उठता मानव तुझे गिराए,
धरती रौनक, तुम्हें उड़ाए।

कटते जंगल महल बनाए,
पंख पसारे उन्नति पाए।

पर्यावरण सज्जा तू ‘चिरैया।’
दिन-प्रति हाय! झुलसी चिरैया।

घटती गिनती चिड़िया प्यारी,
लुप्त प्राय: प्रजाति न्यारी।

‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाएं,
‘सेव चिरैया’ मुहिम चलाएं।

‘मुख प्रिय हे! प्यारी चिरैया,
तुझ पर नित मैं भारी जाऊँ॥’

परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।