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जगत के पिता

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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‘रामनवमी’ विशेष (२६ मार्च)…

राम सुख के सागर,
करतें हैं हम सब पर कृपा
उनका ‘विश्वास’ व त्याग अमर,
वह है, हमारे ‘जगत’ के पिता।

‘राम’ नाम की छवि ‘मनोहारी’,
राम से ही जग अभिलाषी
उनके बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता,
वह है, हमारे ‘जगत’ के पिता।

मर्यादा पुरुषोत्तम राजा ‘राम’ के,
कर्म ने सिखा दिया मनुष्य धर्म
मानव कल्याण का मार्ग दिखा दिया श्री राम ने,
वह है, हमारे ‘जगत’ के पिता।

आओ हम सब ‘मिलकर’ मनाएं
‘रामनवमी महोत्सव’,
साथ मिलकर गायें रामनाम
शहर हो या गाँव हर जगह निकले प्रभु राम की शोभायात्रा,
वह है, हमारे ‘जगत’ के पिता।

क्योंकि भये प्रकट दीनदयाल कौशल्या हितकारी,
‘राम’ नाम से ही चलती है केवट की नौका हमारी।
वह ‘राम’ ही है, जिन्होंने शबरी के झूठे बेर खाए,
वह है ‘जगत’ के पिता… मेरे राम॥