कुल पृष्ठ दर्शन : 2

शांति की कामना

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
**********************************

युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?

क्यों विनाशक शक्ति का
उपयोग करता जा रहा,
युद्ध का उन्माद यह
प्रतिदिन ही बढ़ता जा रहा।

क्यों ये उन्मादी कदम
आगे बढ़ाता जा रहा,
अपने हाथों ही प्रलय के
बीज बोता जा रहा।

विश्व जनमत को भी ये
अस्वीकार करता जा रहा,
सभ्यता के नाम का
संहार करता जा रहा।

प्राणी वहाँ भयभीत
जलवायु प्रदूषित हो रही,
है धरा व्याकुल ये किन
हाथों से शोभित हो रही।

अब भी है अवसर क़हर
यह बंद हो कल के लिए,
है वही विजयी करे जो
काम जनहित के लिए ।

युद्ध यह रुकना ज़रूरी,
देश कहता जा रहा।
शांति की इस कामना में,
दिन गुज़रता जा रहा॥