हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)….
जब कश्मीर में अमन-चैन की इबादत लिखी जा रही थी, सभी भाई-बंधु मिलजुलकर एकजुटता की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल प्रस्तुत कर रहे थे; ऐसे में दुश्मन पाकिस्तान के आतंकवादियों ने अमन-चैन को खत्म करने का दुस्साहस किया। वह भी तब, जबकि माँ भारती की गोद में सभी उस पार्क में घूम रहे थे, तो दुश्मन को यह अच्छा नहीं लगा। उन्होंने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी और आतंकवादियों ने बेगुनाह लोगों को मार दिया था।
वह हमें कायर समझता था, लेकिन भारत सरकार ने इसको हाथों-हाथ लेते हुए ईंट का जवाब पत्थर से दिया। भारतीय सेना ने तीनों सेनाओं को लेकर अभियान ‘आपरेशन सिंदूर’ चलाया, तो पाकिस्तान की बोलती बंद हो गई थी। मुँह छुपाने की जगह तलाश रहा था। आज पराक्रम व शौर्य की गौरवगाथा ‘आपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर हम तो यही कहेंगे कि इस युद्ध में सही मायने में भारतीय रक्षा प्रणाली के ‘अटूट संकल्प’ से हमारा भारत जीता था। माता-बहनों के सिंदूर की लाज हमारी तीनों सेनाओं ने बचाई थी। उसी नारी शक्ति ने आतंक के उस काले चेहरे को चुनौती दी थी। भारतीय महिला शक्ति और सेना के सभी जवानों ने पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब दिया। ऐसे समन्वय करते हुए ही भारत की तीनों सेनाओं ने आत्मनिर्भरता के साथ भारतीय तकनीकी यानी स्वदेशी रक्षा प्रणाली के तहत एकदम सटीक रणनीति बनाई थी। हमारी वर्तमान पीढ़ी और युवा तरुणाई को सेना के इस शौर्य-पराक्रम से बहुत कुछ सीखना चाहिए। ‘आपरेशन सिंदूर’ से साफ है कि भारत किसी से कम नहीं है। हमने कभी भी झुकना नहीं सीखा है। आमने-सामने की लड़ाई के साथ साथ विश्व पटल पर भी हमारी विदेश नीति के तहत हम दुश्मनों से दो-दो हाथ कर सकते हैं। यह अभियान भारतीय सेना के परिश्रम व सटीक रणनीति का जश्न है, जो भारत के आत्मबल को भी बढ़ाता है। दुश्मन को हमेशा याद रखना होगा कि यह अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि एक बार फिर भारत मुँहतोड जवाब देगा। हमारे वीर शहीदों व सैनिकों को शत-शत नमन।