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‘गुनगुनी धूप’ मानवीय संवेदनाओं की ईमानदार अभिव्यक्ति

लोकार्पण…

इंदौर (मप्र)।

‘गुनगुनी धूप’ मानवीय संवेदनाओं की एक ईमानदार अभिव्यक्ति है। तनुजा जी ने बनावटी शिल्प के बजाय नैसर्गिक सौंदर्य के साथ साधारण जीवन से गहरे कथा-बीज चुने हैं। रचनाएँ अपनी नियति खुद तय करती हैं और लेखक को स्वयं अपनी रचना का पहला निर्णायक होना चाहिए।
      मुख्य अतिथि डॉ. सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, दिल्ली) ने ​वामा साहित्य मंच के सानिध्य में लेखिका तनुजा चौबे के प्रथम कहानी संग्रह ‘गुनगुनी धूप’ का लोकार्पण करते हुए यह बात कही। समारोह का शुभारंभ वाणी जोशी द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना से हुआ। मंच की प्रचार सचिव सपना साहू ‘स्वप्निल’ ने बताया कि अध्यक्ष ज्योति जैन ने स्वागत भाषण में लेखिका की अनवरत लेखन ऊर्जा की सराहना करते हुए कहा कि तनुजा जी का लेखन एक शांत सरोवर जैसा है; जैसे गुनगुना पानी स्नान में सुकून देता है, वैसे ही उनकी कहानियाँ ‘गुनगुनी धूप’ की तरह मन को तृप्ति देती हैं।
  समारोह का विशेष आकर्षण वरिष्ठ साहित्यकार सूर्यकांत नागर का सम्मान रहा। विशिष्ट वक्ता डॉ. गरिमा दुबे ने संग्रह की कहानियों पर चर्चा करते हुए उनके शिल्प और भावनात्मक गहराई को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये कहानियाँ अपनी मासूमियत और सरलता में अत्यंत सम्प्रेषणीय हैं।
   लेखिका तनुजा चौबे ने सृजन प्रक्रिया साझा करते हुए बताया कि इस संग्रह में बचपन से लेकर अब तक के अनुभवों, स्त्री-मन के अनकहे संवादों और सामाजिक यथार्थ को पिरोया गया है।
   समारोह में किसलय पंचोली, राजेश चौबे, सपना  साहू और दामिनी ठाकुर ने अतिथियों का स्वागत किया।
    कुशल संचालन संजय पटेल ने किया। सहसचिव अंजना चक्रपाणि मिश्र ने आभार व्यक्त किया।
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