केवड़िया (गुजरात)।
पराधीनता के प्रतीक ‘इंडिया’ के स्थान पर हमारे देश का नाम भारत रखे जाने का विषय अनेक वर्षों से चर्चा में रहा है। इस संबंध में लेखक द्वय डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’ और डॉ. राजेश्वर कुमार द्वारा ‘इंडिया नहीं भारत’ नामक पुस्तक तैयार की गई है। गुजरात साहित्य अकादमी द्वारा केवड़िया में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा के सान्निध्य में नर्मदा नदी के तट पर स्थित सभागार में आयोजित भव्य भारतीय भाषा संगम के उद्घाटन समारोह में भारत सरकार के संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा ‘इंडिया नहीं भारत’ नामक इस पुस्तक का विमोचन किया गया।
इस अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल भाई कोठारी, गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष भाग्येश भाई झा, सचिव जयेंद्र सिंह तथा लेखक द्वय मंच पर उपस्थित रहे। सभागार में उपस्थित देश के सभी राज्यों के और विभिन्न भारतीय भाषाओं के उपस्थित विद्वान प्रतिनिधियों ने करतल ध्वनि के माध्यम से इस पहल का स्वागत करते हुए लेखक द्वय का अभिनंदन किया।
हजारों वर्ष से हमारा देश ‘भारत’ नाम से प्रख्यात रहा है। इसके पीछे इसकी हजारों वर्ष प्राचीन पृष्ठभूमि है। हमारे देश के प्राचीन ‘भारत’ नाम को लेकर भी लोगों के बीच विभिन्न प्रकार की भ्रांतियाँ व्याप्त रही हैं। जम्बूद्वीप, अजनाभवर्ष, आर्यावर्त्त, सप्तसिंधु, भारतवर्ष, हिंदुस्तान आदि नामों को लेकर सामान्य जन के मन में अनेक प्रश्न उठते रहे हैं- इन प्रश्नों का विस्तार से उत्तर लेखक द्वय की नई पुस्तक ‘इंडिया नहीं भारत’ में दिया गया है।
(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुम्बई)