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पृथ्वी, नदियाँ और पहाड़

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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पृथ्वी, नदियाँ और पहाड़,
कितना प्यारा यह संसार
ईश्वर की है सृष्टि महान,
करते हैं सब इन्हें प्रणाम।

हरियाली है चारों ओर,
नाविक ने पकड़ी है डोर
सैर कराता पानी में वह,
सुंदर सुखद सुनहरी भोर।

मात-पिता से कहते बच्चे,
ये पहाड़ हैं कितने अच्छे
नाव में बैठ हमें भी जाना,
पानी में हमें सैर कराना।

पापा ने नाविक को बुलाया,
हमको नाव की सैर कराई।
आज किया हमने विश्राम,
कल सब लगेंगे अपने काम॥