डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती
बिलासपुर (छतीसगढ़)
*************************************************
कभी-कभी तुमसे,
गुफ्तगू कर लेते हैं
तेरे हाँ-हूँ से ही,
जी भर लेते हैं।
तेरी बेवजह हँसी से,
दिल को गुलज़ार कर लेते हैं
देख लेते हैं कभी तुझे आड़ से,
तू मेरी ओर मुड़े तो ऐतबार कर लेते हैं।
सपनों में प्रेम गीत गुनगुनाकर,
मीठी नींद के आग़ोश में सो जाते हैं
इस प्रीत के बदले,
हम तेरा क्या लेते हैं।
देख लेते हैं बस तुझको,
तपिश दिल की बुझा लेते हैं।
सुबह-शाम तेरे लिए रब से,
हजारों दुआ माँग लेते हैं॥