पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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व्हाट्सऐप पर आने वाले संदेशों ने लोगों के बीच ज्ञान की गंगा बहा दी है। इन संदेशों को पढ कर लोग बिना सोचे-समझे अपने को महाज्ञानी समझते हुए कई बार अंधानुकरण भी करने लगते हैं। इसी लिए कई बार मजाक में लोग कह उठते हैं, कि “यह व्हाट्सऐप यूनिवर्सटी का ज्ञान है क्या ?”
आजकल व्हाट्सऐप बेहद लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है, जो जनसामान्य के लिए व्यवसायिक एवं व्यक्तिगत संवाद का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है, परंतु कुछ लोगों का कहना है कि यह आपसी रिश्तों में दूरी और तनाव भी पैदा कर रहा है।
दरअसल, इस प्लेटफॉर्म पर अक्सर सतही और संक्षिप्त बातचीत होती है, जो व्यक्तिगत संवाद और आपसी बातचीत की गहराई को कम कर देते हैं। पहले जब लोग एक-दूसरे से मिलते थे तो आँखों में आँखें डाल कर बातें किया करते थे। एक-दूसरे के चेहरे के हाव-भाव, स्वर का उतार-चढ़ाव और आपसी स्पर्श सब कुछ संवाद का हिस्सा होता था। अब व्हाट्सऐप के माध्यम से ये सब इमोजी और टाइपिंग में बदल गया है, जिसमें न तो कोई भावना स्पष्ट होती है, ना ही कोई आत्मिक और भावनात्मक जुड़ाव।
व्हाट्सऐप पर जब कोई सन्देश करता है, तो वह उम्मीद करता है कि आप उसका उत्तर देंगें, लेकिन कई बार व्यस्तता या अन्य वजह से जल्दी उत्तर न देने पर आपस में गलतफहमी पैदा हो जाती है। इसके कारण आपसी रिश्तों में बेवजह तनाव पैदा हो जाता है।
कहना गलत नहीं होगा, कि व्हाट्सऐप अब संवाद से ज्यादा आपसी प्रतिस्पर्धा और तुलना का केंद्र बनता जा रहा है। कौन क्या साझा कर रहा है, किसका स्टेटस कैसा है, किसने किसको विश किया या नहीं किया,… ये बातें अब आपसी संबंधों की बुनियाद तय करने लगी है। असली भावनाओं, संवेदनाओं, सहानुभूति एवं खुशी की जगह आभासी (वर्चुअल) दिखावे ने ले ली है। व्हाट्सऐप पर बातें तो बहुत होती हैं, पर ना आत्मीयता है और ना ही भावनाएं।
आजकल हम सभी दिनभर ऑनलाइन रहते हैं, लेकिन अपने दिल की बात किसी से भी साझा नहीं कर सकते, क्योंकि सभी दिखावे की ज़िंदगी जी रहे हैं।
लगातार आने वाले सन्देश और नोटिफिकेशन हमारे रिश्तों पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम कर देते हैं। लगातार ऐसे सन्देश देखकर लोगों के मन में भेजने वाले के प्रति गुस्सा और ऊब की भावना पैदा होती है। व्हाट्सऐप का अत्यधिक उपयोग लोगों को एक-दूसरे के साथ वास्तविक बातचीत और शारीरिक संपर्क से दूर कर देता है।
हमें समझना होगा कि व्हाट्सऐप पर एक-दूसरे को संदेश भेजना आपसी बातचीत का कभी भी विकल्प नहीं हो सकता है।