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सेवा सदा करते रहें

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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पितु-मात सम कोई नहीं
आशीष उनसे लीजिए,
चरण रज छू करके उनके
सफल जीवन कीजिए।

उनके किए उपकार का
हम ऋण चुका सकते नहीं,
करते हैं कितना प्यार वे
वह भी बता सकते नहीं।

जो हो सके उनके लिए
सेवा सदा करते रहें,
खुश उनको रखना आपको
तरकीब खुद चुनते रहें।

ये बात बिलकुल सत्य है
जीवन अलग है आपका,
समय पर मिलना-मिलाना
कर्तव्य है यह आपका॥