नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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ऐ मेरे बच्चे,
मरकर भी दूँगी तुमको दुआएँ
जिस पल तुम मुझे याद करोगे,
मैं साया बनकर साथ रहूँगी।
अचानक जब जिह्वा पर,
आएगा मेरा नाम
मैं साया बनकर साथ रहूँगी,
तेरे संकल्प बनकर आ जाऊँगी।
घनघोर अँधेरा हो,
या घनघोर निराशा
जब सूझे न कोई राह,
मैं आशा बनकर आ जाऊँगी।
उस पल जब तुम याद करोगे,
मैं साया बनकर साथ रहूँगी
तेरे विश्वास बनकर आ जाऊँगी,
तेरे मन का दीप जलाऊँगी।
जब जीवन में संघर्ष होगा,
कोई न साथी संग होगा
हार मानने से पहले,
मुझे एक बार याद करना।
उस पल जब तुम याद करोगे,
मैं साया बनकर साथ रहूँगी
तेरी दृढ़ता बनकर आ जाऊँगी,
हर कदम पर तेरा साहस बनूँगी।
मेहनत करते जब जी घबराए,
जीवन में उलझन ही उलझन आए
हर पल जीना कठिन लगे,
आशा का दीप न बुझने पाए।
उस पल जब तुम याद करोगे,
मैं साया बनकर साथ रहूँगी
तेरे परिश्रम की शक्ति बनकर,
तेरी राह सदा आसान करूँगी।
मरकर भी दूँगी तुमको दुआएँ,
माँ का स्नेह कभी नहीं मरता
तन भले ही मिट्टी में मिल जाए,
ममता का आशीष सदा साथ चलता।
जीवन का यही सत्य है,
प्रेम अमर हो जाता है।
माँ चली भी जाए जग से,
उसका आशीर्वाद कभी नहीं जाता॥