बबिता कुमावत
सीकर (राजस्थान)
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ज़िंदगी का नाम दोस्ती… (मित्रता दिवस विशेष)….
रिश्तों की भीड़ में
कुछ संबंध जन्म नहीं लेते,
वे विश्वास की मिट्टी में
धीरे-धीरे अंकुरित होते हैं।
मित्र वही है-
जो शब्दों से पहले
आँखों की भाषा पढ़ ले,
मौन की धड़कनों को सुन ले
और टूटते हुए मन को,
बिना किसी शोर के थाम ले।
जब समय की धूप
बहुत तीखी हो जाती है,
वही छाँव बनकर
कंधे पर हाथ रख देता है
जब रास्ते धुँधले पड़ते हैं,
वही दीपक की तरह
दिशा दिखाता है।
मित्रता कोई सौदा नहीं,
न ही लाभ-हानि का हिसाब
यह तो वह नदी है-
जो बिना प्रतिफल चाहे,
स्नेह का जल बहाती रहती है।
जीवन की पुस्तक में,
यदि कुछ पृष्ठ
बार-बार पढ़े जाते हैं,
तो उनमें मित्रों की हँसी,
साझे संघर्ष
अनगिनत स्मृतियाँ,
और विश्वास के हस्ताक्षर होते हैं।
मित्र वह नहीं-
जो केवल उत्सवों में साथ हो,
मित्र वह है
जो पराजय के अँधेरे में भी,
आशा का दीप जलाए रखे।
आओ,
इस मित्रता दिवस पर
हम केवल शुभकामनाएँ न दें,
बल्कि अपने संबंधों में
सत्य, संवेदना, सम्मान और अपनापन
फिर से बोएँ,
ताकि आने वाला समय कह सके,
कि इस बदलती दुनिया में भी
कुछ रिश्ते ऐसे थे-
जो स्वार्थ से नहीं,
सिर्फ़ प्रेम से जीवित रहे॥