प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
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मोहि श्रीगुरु जतन करायो, मंगल छाया,
जीवन खुशबू से है पूरित, पर्व सुहाया।
अंधकार में उजलापन है, रौनक के पल,
सीख है गुरुवर की, जिसने उल्लास सजाया।
बिना गुरू के ज्ञान कहाँ हैं, बोध नहीं,
जीवन दर्शन पाकर के उल्लास सजाया।
गुरुवर की महिमा से मौसम हरसाता,
रीति-नीति का मान आज उर में आया।
कृपा आज तो फलीभूत है,जय बोलो,
जीवन में मधुमास सीख में भर आया।
श्रीगुरु की है बात निराली पल चहके,
जीवन अब सम्पूर्ण दूर भ्रम की माया॥