होली

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** होली की हुड़दंग में,डूब न जाना यार। मजे-मजे से आप भी,खूब मना त्यौहार॥ गिले-शिकवे भूल कर,रंग प्यार का खेल। दुश्मन से भी प्रेम से,कर लेना जी मेल॥ होली का त्यौहार है,गूँज रहे हैं फाग। ढोल नगारा संग में,छेड़ रहे हैं राग॥ देख हवा मदमस्त है,छायी रूत खुमार। मौसम … Read more

कवि दुर्गेश राव सम्मानित

जबलपुर। विश्ववाणी हिंदी संस्थान जबलपुर (मध्यप्रदेश) द्वारा युवा कवि दुर्गेश राव को ‘हिंदी सेवी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कवि आचार्य कृष्णकांत चतुर्वेदी ने आपको यह सम्मान हिन्दी में लेखन सेवा के लिए दिया है। मनासा जिला नीमच (मध्य प्रदेश) निवासी दुर्गेश राव(वर्तमान निवास इंदौर) को इस उपलब्धि के लिए सभी मित्रों ने शुभकामनाएं दी … Read more

बदलेगी दशा व दिशा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** स्वयं घर परिवार नहीं,निरामीष परिवेश। वतनपरस्ती में लगा,है प्रधान इस देश॥ वोट बैंक के जाल में,फँसा धर्म निरपेक्ष। एक धर्म की आड़ में,बँटा देश परिपेक्ष॥ कैसा ये गठजोड़ है,कौन सियासी चाल। आतंकी करता सबल,इच्छुक मालामाल॥ गाली दे दे एक को,न थकते हैं गाल। है प्रधान बस दृढ़ पथी,देश … Read more

हवा हूँ

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** हवा हूँ,हवा हूँ ठंडी हवा हूँ, चलती हूँ ऐसे मस्तानी जैसी। कुदरत ने हमें बनाया पूरी रफ्तार में हमें उड़ाया, कभी खुशिया बाँटी तो कभी गम को बिखेरा। इस जहाँ में आई सरगम लुटाई, चमकी आसमान में धरा पर बूंदें गिराई। कभी दीदार बन के उभरी तो कभी मौसम को बदला, … Read more

कुदरत से ही खेल रहे…

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** कैसे-कैसे हुए प्रदूषण,कैसे हम सब झेल रहे हैं, निजी स्वार्थ में जाने क्यूँ हम,कुदरत से ही खेल रहे हैं। वायु प्रदूषण देखा हमने,और प्रदूषित जल देखा, बीज जो हमनें बोए थे अब,आज उन्हीं का फल देखा। नई-नई बीमारी देखी,नए-नए उपचार दिखे, कहीं-कहीं तो सचमुच ही हम,बिलकुल ही लाचार दिखे। दोष … Read more

फागुन आया

निशा निइ्क ‘ख्याति’ दिल्ली ******************************************************************** अब तो फागुन आया पिया इश्क़ का रंग लगा दे मुझे, अम्बिया पे चढ़ गये मंजर वो इश्क़ का जाम पी आया। क्यों इस क़दर तूने मुझे सताया क्यों इतना बेपरवाह दिखाया, जब जाती हूँ खेतों से अहरारी भी हँसती है। ले के फूल मोहबत के खुद पे इतराती है, … Read more

३३ फीसदी स्थान तय:ओडिशा में महिलाओं को महत्व

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक बधाई के पात्र हैं,जिन्होंने घोषणा की है कि वे इस लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के कुल उम्मीदवारों में ३३ प्रतिशत सीटें महिलाओं को देंगे। महिलाओं को ३३ प्रतिशत सीटें विधानसभाओं और लोकसभा में देने का विधेयक पिछले २५ साल से अधर में लटका हुआ … Read more

राजनीति की बात करने से भागिए मत

हेमेन्द्र क्षीरसागर बालाघाट(मध्यप्रदेश) *************************************************************** राजनीति अब इतनी नागवार लगने लगी है कि राजनीति की बातें करने से लोग परेहज लगे हैं। तभी तो दुकानों में,कार्यालयों में,घरों में तख्ती लटका कर और समूहों में इत्तला देकर सजग किया जाने लगा है कि यहां राजनीति की बातें करना मना है। मना क्यों,बात ही तो कर रहे,उसमें हर्ज … Read more

कुर्ता भले सफेद…जोगीरा सा रा रा रा

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** नेता नोटों की गड्डी से खेल रहे हैं खेल, जीवन अपना फीका-फीका मिले नमक ना तेल- जोगीरा सा रा रा रा…। अक्सर क्यों पा जाते कुर्सी दिल के काले चोर, भोली-भाली जनता रोती होकर भावविभोर- जोगीरा सा रा रा रा…। अव्वल दर्जे का है झूठा कुर्ता भले सफेद, उसकी … Read more

स्वयं से रूबरू होने का लक्ष्य बनाएं

ललित गर्ग दिल्ली ************************************************************** सफल एवं सार्थक जीवन के लिये व्यक्ति और समाज दोनों अपना विशेष अर्थ रखते हैं। व्यक्ति समाज से जुड़कर जीता है, इसलिए समाज की आँखों से वह अपने-आपको देखता है। साथ ही उसमें यह विवेकबोध भी जागृत रहता है ‘मैं जो हूँ,जैसा भी हूँ’ इसका मैं स्वयं जिम्मेदार हूँ। उसके अच्छे-बुरे … Read more