फागुन आया देह में…

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* फागुन आया देह में, जागी आज उमंग।मन उल्लासित हो गया, फड़क उठा हर अंग॥ फागुन लेकर आ गया, प्रीति भरा संदेश।जियरा को जो दे रहा, मिलने का आवेश॥ फागुन की अठखेलियाँ, होली का पैग़ाम।हर कोई लिखने लगा, चिठिया प्रिय के नाम॥ फागुन की मदहोशियाँ, छेड़ें मीठी तान।हल्का जाड़ा कर रहा, अनुबंधों … Read more

शाकाहारी भोजन ही श्रेष्ठ

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ शाकाहारी भोजन हमारे शरीर की मूलभूत आवश्यकता है। स्वस्थ शरीर के लिए शाकाहारी भोजन अमृत के समान है। आज विश्व में बढ़ते अत्याचार, मार-काट, हिंसा की इस एक लहर-सी चल पड़ी है, वहीं मनुष्य में दया, प्रेम, मानवता के खत्म होने का मुख्य कारण मांसाहार और मदिरापान है। भारतीय संस्कृति … Read more

वादा निभाया था मैंने

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** अजनबी को गले से लगाया था मैंने,जो वादा किया वो निभाया था मैंने।प्यार की राह पर घर बसाया कभी-अपना सब कुछ उसी पर लुटाया था मैंने॥ संसार में सब कुछ बस एक सपना है,यहाँ कुछ भी तो नहीं अपना है।जिसके भाग्य में लिखा है जितना-उतना ही तो उसको मिलना है॥

उम्र को हावी न होने दें

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ आजकल अनेक महिलाएं अपने घर की दहलीज पार कर नौकरी या व्यवसाय में व्यस्त हैं, परंतु अभी भी बहुत-सी महिलाओं की बड़ी आबादी ऐसी है, जो गृहिणी कहलाती है। यह सुबह से रात तक घरेलू कामों में लगी रहती हैं। झाड़ू पोंछा, बर्तन, खाना आदि कामों में व्यस्त रहने के कारण उन्हें … Read more

पुस्तक का विमोचन किया, कविता-ग़ज़ल सुनाई

छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र)। विशेष अतिथि कैबिनेट मंत्री अतुल सावे, ज्येष्ठ साहित्यकार डॉ. ऋषिकेश काम्बले तथा साहित्यकार आशा खरतडे-डांगे ने एड. टी. शिपे उर्फ सूर्यकांत काका द्वारा लिखित पुस्तक ‘माझी आई गिरजाबाई’ का विमोचन किया। समारोह की अध्यक्षता डॉ. काम्बले ने की।इस अवसर पर श्री सावे ने कहा कि यह पुस्तक पाठकों के मन को अवश्य … Read more

पल भर का सुकून पाठक को मिल जाए, ऐसी कहानी होना चाहिए

भोपाल(मप्र)। वर्तमान समय में हमें अपनी जड़ों को पहचानने की ज़रुरत है। आजकल पौराणिक पृष्ठभूमि की कहानियों का चलन है, लेकिन इसमें बहुत सावधानी की जरूरत है। प्रस्तुतिकरण अच्छा हो तो कहानी श्रोताओं को अपनी ओर सहज आकर्षित करती है। आज की मशीनी ज़िन्दगी में पल भर का सुकून पाठक को मिल जाए, ऐसी कहानी … Read more

आकार में छोटी, प्रभाव में बड़ी है लघुकथा

लघुकथा महोत्सव… भोपाल (मप्र)। कथा परिवार में लघुकथा कथा आकार में छोटी, लेकिन प्रभाव में बड़ी सदस्य है। लघुकथा की लोकप्रियता उसके लघु आकार के कारण नहीं, बल्कि तीव्र प्रहार और प्रभाव के कारण हुई है।यह बात साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश के निदेशक डॉ. विकास दवे ने कही, जो हिंदी भवन के महादेवी वर्मा कक्ष … Read more

रोटी होती अनमोल

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* रोटी होती गोल-मटोल,सबके लिए होती अनमोलखाकर मीठे बोलें बोल,गाएं गीत, बजाएं ढोल। मेहनत करके खाते रोटी,कोई पतली, कोई मोटीरोटी पर तो दुनिया टिकती,तरह-तरह के मोल में बिकती। माँ के हाथों की रोटी का,स्वाद निराला होता हैअन्नपूर्णा बन घर में बसती,पूजा का फल मिलता है। दूर देश हो या विदेश … Read more

मिलकर रचनी होगी संवेदना की संस्कृति

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बेटियाँ किसी समाज की संवेदना का दर्पण होती हैं। जहाँ बेटियाँ सुरक्षित, शिक्षित और स्वायत्त हैं-वहाँ सभ्यता की जड़ें गहरी होती हैं, पर विडंबना यह है कि आधुनिक प्रगति के दावों के बीच आज भी अनेक बेटियाँ असमानता, हिंसा और अवसर-वंचना का भार ढो रही हैं। ‘बेटी बचाओ’ जैसे … Read more

एआई:नवाचार की गति और नियंत्रण के बीच संतुलन की चुनौती

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** कृत्रिम मेधा (एआई) का विकास इक्कीसवीं सदी की सबसे तेज़ और प्रभावशाली तकनीकी प्रक्रियाओं में से एक है। कुछ ही वर्षों में एआई ने उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त, रक्षा और मीडिया-हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यह तकनीक उत्पादकता बढ़ा रही है, जटिल समस्याओं का समाधान सुझा रही है … Read more