भटकते युवा सोचो बारम्बार

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** ना करो तुम इतना प्यार कष्ट मिलेगा बारम्बार, झूठ-फरेब का सपना आएगा- हो जाओगे बर्बाद। लक्ष्य तुम्हारा मिट जाएगा दुःख-संकट से घिर जाओगे, इस जहाँ में छुप-छुप कर- मिटने के लिए तुम,तुल जाओगे। ये दुनिया एक चोला है जो समझ गया ना डोला है, अजर-अमर हो जाता है- देश को रौशन … Read more

बूँद-बूँद में गुम-सा…

सुनीता रावत  अजमेर(राजस्थान) ************************************************************* बूँद-बूँद में गुम-सा है, ये सावन भी तो तुम-सा है बूँद-बूँद में गुम-सा है, ये सावन भी तो तुम-सा हैl एक अजनबी एहसास है, कुछ है नया,कुछ ख़ास है कुसूर ये सारा मौसम का है, बूँद-बूँद में गुम-सा है ये सावन भी तो तुम-सा हैll चलने दो मनमर्ज़ियाँ, होने दो गुस्ताखियाँ … Read more

लोकतंत्र में मतदाता की भूमिका

शम्भूप्रसाद भट्ट `स्नेहिल’ पौड़ी(उत्तराखंड) ************************************************************** कहते हैं कि “लोकतंत्रीय शासन व्यवस्था अंतर्गत मतदाता देश का भाग्य विधाता होता है।” मतदाता के मत की शक्ति का आंकलन तब अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है,जब किसी प्रत्याशी को एक-एक मत की प्राप्ति या अप्राप्ति के कारण जीत या हार का सामना करना पड़ता है। इसलिए,कहा जा सकता है … Read more

चुनावी चकमक-जै खद्दर धारी…

अनुपम आलोक उन्नाव(उत्तरप्रदेश) ****************************************************************** जै खद्दरधारी,भइया…जै खद्दर धारी, वरदहस्त हो तुम्हरा…विपत्ति टरै सारीl भइया…जै खद्दरधारीll देख चुनावी मौसम…फौरन प्रकट भए, जीत इलेक्शन भाई,सब-कुछ गटक गएl जातिवाद के पोषक,शकुनि के अवतारी, जै खद्दरधारी…भइया जै खद्दरधारीll तुम हर्षद के पापा…नीरव के यारा, माल्या जी के वंशज,तुमको धन प्याराl चारा और यूरिया…व्यापमं बलिहारी, जै खद्दरधारी…भइया जै खद्दरधारीll पहला … Read more

छुपो नहीं किवाड़ में

डॉ.नीलिमा मिश्रा ‘नीलम’  इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) ************************************************************** (रचना शिल्प:१२१ २१२ १२१ २१२ १२१ २१२) चले जो लेखनी लिखे नवीन छंद कल्पना, समाज को मिले दिशा करूँ नवीन सर्जना। चुनाव की सभी दिशा हवा फ़िज़ा बहार है, सभी लगा रहे क़यास कौन दावेदार है। जरा रुकें जरा सुनें,जरा इसे जगाइये, ज़मीर को जगाइये जवाब आप पाइये। … Read more

नहीं करें प्रकृति का क्षरण

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… मौत का कैसा समां,दिखा रहा है क्यूँ ख़ुदा, प्रकृति के नजारे,क्यूँ कुपित लगे हैं सारे। बादल गरज रहे हैं,कहीं प्यासी तड़पती धरती, बिलख रहे हैं मासूम यहाँ पे,वहां पे बाढ़ आई। तबाही का खेल खेले,लाशों के ढेर इतने, दफनाने को जगह नहीं,सर छुपाने को घर … Read more

मैं पृथ्वी हूँ

टीना जैन  उदयपुर(राजस्थान) ********************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… ब्रम्हांड की खूबसूरत कृति हूँ, हाँ,मैं पृथ्वी हूँ। मुझसे आलिंगन करता समीर है, नक्षत्रों को चिढ़ाता,करता अधीर है। मेरे अंक में ही जीवन पलता है, अलग-अलग रूपों में ढलता है। हरियाली रज का मेरा आँचल है, सागर जल बनता मेरी पायल है। पर्वत नदियाँ करती मेरा … Read more

भू तू बड़ी महान

नवीन कुमार भट्ट नीर मझगवाँ(मध्यप्रदेश)  ************************************************************* विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… पावन धरती मात को,है वंदन बारम्बार। गौरव की गाथा लिखी,गूँजे जय जयकारll धरती माँ के गोद से,निकली सीता मात। तेरी कथा अटूट है,दिन चाहे हो रातll हरियाली साड़ी पहन,धरती गाती गीत। नदियाँ झरने कूप को,यही दिलाती जीतll ममता का सागर भरा,कभी न करती क्रोध। गलती … Read more

चलो चलते हैं सरहद पर

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** उन्हें लज्जा नहीं आती,उन्हें लज्जा न आने दो। हमें सरहद पे जाकर के ज़रा सर काट लाने दो। शहादत ये जवानों की नहीं हो रायगाँ हरगिज़, किया इस काम को जिसने उसे जग से मिटाने दो। बुजुर्गों ने लहू देकर बचाया था जिसे कल तक, पसीना अब … Read more

करो धरा से प्यार

सुनीता बिश्नोलिया चित्रकूट(राजस्थान) ****************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… कानन-नग-नदियाँ सभी,धरती के श्रृंगार। दोहन इनका कम करें,मानें सब उपहार॥ अचला का मन अचल है,डिगे न छोटी बात। पर मानव का लोभ क्यों,छीन रहा सौगात॥ देख धरा की ये दशा,पीर उठी मन माय। जख्म जिगर में देय के,कोय नहीं सुख पाय॥ हरी-भरी धरती रहे,नीला हो आकाश। … Read more