कृत्रिम बुद्धिमत्ता:नियमन की दौड़ और भारत की स्थिति

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक के मध्य तक आते-आते ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ केवल एक तकनीकी नवाचार भर नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, कूटनीति और सामाजिक संरचना को पुनर्परिभाषित करने वाली निर्णायक शक्ति बन चुकी है। २०२६ का वर्ष इस परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, … Read more

प्यारी तितली रानी

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** बड़ी ही प्यारी लगती है रानी तितली,उड़ती-फिरती, करे मनमानी तितली। लाल, गुलाबी, पीले पंख की सुंदर तितली,कहीं ना रूकती, रंग-बिरंगी तितली। फूलों पर है हरदम मंडराती तितली,कभी यहाँ-कभी वहाँ जाती तितली। फूलों का मीठा रस पी जाती तितली,बागों में सुंदरता फैलाती तितली। छोटे-छोटे पंख हिलाती तितली,सबके मन को खूब लुभाए तितली। … Read more

चंद उदासियाँ

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ज़िन्दगी में उदासियाँ आती ही रहती हैं,कभी किसी से मतभेद भी होते हैंमन में उदासी हो ही जाती है,मन बेचैन होकर उदासी में खो जाता है। अब हर समय यही उदासी दिल पर छाई रहती है,किसी भी काम को करने की इच्छा नहीं होतीदुश्वार हो जाता है समय काटना भी,मन की … Read more

नारी शक्ति, शिवा स्वरूपा

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…. नारी सृष्टि का संचार, नारी सृष्टि का आधारनारी सब रिश्तों का भण्डार, नारी बिन सूना संसारनारी जननी नारी धरणी, नारी से सब शोभायमान,नारी मूर्त प्रेम व्यवहार, नारी धरती का श्रृंगार। नारी करूणा नारी अपर्णा, नारी धूप, ठंडी छाँव,नारी माँ नारी भगिनी, नारी कोमल, घाव सहलावसहचरी … Read more

‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ का हुआ विमोचन और चर्चा

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दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (नई दिल्ली) के कलानिधि विभाग द्वारा ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ (३ खंड) पुस्तक का लोकार्पण एवं परिचर्चा कार्यक्रम गरिमामय वतावरण में आयोजित किया गया। विजयदत्त श्रीधर की यह कृति भारतीय पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा (पहली सदी : १७८०-१८८०, तिलक युग : १८८१-१९२० और गांधी युग : १९२१-१९४८) का गंभीर एवं … Read more

संवेदनाओं का टूटता घरौंदा…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ अब जीवन का हर एक पल ‘मुश्किलों’ से भरा हुआ है,रिश्तों में ‘दूरियाँ’ बढ़ती जा रही है,कोई किसी का नहीं होता, इस जहान में,तभी तो सामने आ ही जाता है संवेदनाओं का टूटता घरौंदा..। आज ‘भावात्मक’ अभिव्यक्ति शून्य ही हो गई है,कोई किसी का नहीं;मतलबी लोग ‘ज्यादा’ नजर आते हैंआपसी … Read more

तथ्यों की यात्रा को सत्य की परिणति तक पहुँचाना ही शोध-प्रो. अरोड़ा

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दिल्ली। तथ्य अनंत हो सकते हैं, किंतु वास्तविक तथ्यों की यात्रा को सत्य की परिणति तक पहुँचाना ही शोध का अभीष्ट है। तथ्यों की यात्रा को सत्य की परिणति तक पहुँचाना ही शोध है।यह विचार ‘वाङ्मय विमर्श’ द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला श्रृंखला की पाँचवीं कड़ी में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रख्यात विद्वान प्रो. हरीश अरोड़ा ने ‘शोध … Read more

भारत की मिट्टी की उपज है लघुकथा, चर्चा अग्नि पुराण में भी

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भागलपुर (बिहार)। लघुकथा भारत की मिट्टी की उपज है। इसकी चर्चा अग्नि पुराण में भी है, जिसमें लघुकथानिका की चर्चा आती है। २०वीं सदी में हिंदी ने लघुकथा को अपनाया। मराठी लघुकथाकार माधव राव सप्रे ने हिंदी में पहली बार ‘टोकरी भर मिट्टी’ लघुकथा लिखी और १९३७ में प्रकाशित हुई। १९८० के दशक में पारस … Read more

फणीश्वरनाथ रेणु, महादेवी वर्मा एवं ‘अज्ञेय’ की जयंती मनाई

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पटना (बिहार)। मंत्रिमंडल सचिवालय के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में छज्जूबाग स्थित फणीश्वरनाथ रेणु सभागार (हिंदी भवन) में सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, महादेवी वर्मा एवं फणीश्वरनाथ रेणु की जयंती के अवसर पर समारोह आयोजित किया गया। अध्यक्षता विभागीय अपर सचिव सह निदेशक एम.एस. परवेज आलम ने की।प्रारम्भ में आमंत्रित विद्वानों द्वारा दीप प्रज्वलित कर समारोह … Read more

बाल साहित्य द्वारा कर सकते हैं प्राकृ‌तिक चेतना की रक्षा

◾आयोजन में हुआ अनेक पुस्तकों का विमोचन.. भोपाल (मप्र)। यह बाल साहित्य को संवर्द्धित करने का अवसर है।बालकों को हम जैसा वातावरण देंगे, सांस्कृतिक, पारिवारिक, सामाजिक, जो हमारा है, वो उनको श्रेष्ठ बनाता है। प्राकृ‌तिक चेतना की रक्षा बाल साहित्य द्वारा कर सकते हैं। उपदेश से परहेज क्यों ? बच्चे को दिशा-निर्देश दें। रोकना-टोकना करें, … Read more