लहू से लिखा गया लोकतंत्र
कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** ढाका की गलियों में उठी जो आग,वह क्रोध नहीं-सत्ता का नागएक शहर नहीं, चेतना जली,लोकतंत्र की आत्मा छलनी हुई। सवाल पूछना बना अपराध,सच बोलना देशद्रोह का स्वादकानून खड़ा है आँखें मूंद,हाथों में सत्ता, दिल में क्रूरता की धुंध। धर्म ने ओढ़ा नफ़रत का जाल,राजनीति ने खोया नैतिक भालईश्वर का नाम … Read more