हम पिघलते हैं
अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)**************************************************** ख्वाब जब लफ़्ज़ में बदलते हैं।शायरी में तभी तो ढलते हैं। राह की मुश्किलों से डर कर हम,लक्ष्य हरगिज़ नहीं बदलते हैं। राह सबको बता रहे लेकिन,घर से अपने नहीं निकलते हैं। आँच जब प्यार की हमें मिलती,मोम जैसा ही हम पिघलते हैं। साँप जैसे हमें मिले नेता,ज़ह्र मुँह … Read more