आज में जीना सीख लो

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ किस बात से नाराज़ हो।लगते जैसे कोई राज हो। आज में जीना सीख लो,पता नहीं कल क्या साज हो। दिल भँवरा है डोले इधर-उधर,उनके बदले-बदले अंदाज़ हो। नया-नया प्यार हुआ है,नया-नया आगाज़ हो। लंबी उड़ान बाक़ी है अभी,अभी-अभी छूटे परवाज़ हो। ऐसे तेवर पसंद नहीं मुझे,आ भी जाओ अब बाज हो। आज करवा … Read more

मेहरबानी हो गई….

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** ये रात आज कितनी सुहानी हो गयी, जो मुस्कुराईं तुम मेहरबानी हो गयी।  मुखड़े के नूर से बिखर गयी है रोशनी, बोली ये चाँदनी बड़ी बेईमानी हो गयी।  फीके हजारों दीप भी हैं सामने आपके, ये रोशनी भी आपकी दीवानी हो गयी।  थे रूप के अफसाने तेरे वैसे ही मशहूर, काजल जो लगाया तो … Read more

डर नहीं अब आंधियों से

अरशद रसूलबदायूं (उत्तरप्रदेश)**************************************************** ज़ख्म इतने मिल चुके हैं तितलियों से।डर नहीं लगता हमें अब आंधियों से। शुक्रिया,जो आपने छीना सहारा,बच गए हैं आज हम बैसाखियों से। हम मुहब्बत की इबारत लिख रहे हैं,तुम निकल भी आओ दिल की खाइयों से। चार बर्तन इस कदर बजने लगे हैं,डर बहुत लगने लगा शहनाइयों से। बोलते क्या बाप … Read more

आशिकी खलती रही

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** देखकर अँधियार जग में चाँदनी हँसती रही।साथ मेरे चाँद था वो देख कर जलती रही। चाँद से भी खूबसूरत है मिरा दिलबर हसीं,शिद्दतों से उसके दिल में दुश्मनी पलती रही। आँख से शोले बरसते आग थी दिल में लगी,पर न जाने क्यों हमारे साथ वो चलती रही। जल रहा था दिल … Read more

साँसों की डोर

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ ये साँसों की है डोरें न पकड़ी गई।किसी से भी मोहरें न जकड़ी गई। अता न हो सकेगी नेमतें ख़ुदा की,आँखों की ये कोरें न सूखी गई। किसको सुनाऊँ मैं हाले दिल सभी,बात दिल की किसी से न बोली गई। अश्क़ आँखों से भी छुपाते रहे हम तो,दास्तानें ग़मों की न खोली गई। … Read more

पहेली समझ नहीं आती

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ जीवन पहेली समझ में नहीं आती।कैसी है अलबेली समझ में नहीं आती। कितनी ख़्वाहिशें दफ़न हो गई दिल में,इच्छाएँ ज़हरीली समझ में नहीं आती। दिन-रात आते औऱ चले जाते हैं,किरणें रंग रँगीली समझ में नहीं आती। दुनिया के ख़ेमे में है साँसों की सरगम,कब तक सहेली समझ नहीं आती। ‘रेणू’ कहे ग़म के … Read more

तन्हाई

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** तन्हाई बनाती थी,बद रूप जमाने के,मैं गीत बनाता हूँ,तन्हाई मिटाने के। गीतों से बना क्या है,जाना न कभी मैंंने,सब गीत अलग धुन में,सजते हैं सुनाने के। अब सीख लिया मैंने,तन्हाई में जीना भी,कुदरत से हुनर पाए,हैं गीत बनाने के। जबसे मैं हुआ तन्हा,भगवान रहा करते,उनकी ही शरण में तो,बनते … Read more

इतराना अच्छा नहीं

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ किसी को साँसों में बसाना अच्छा नहीं होता।दिल की बेबसी पर इतराना अच्छा नहीं होता। मिलने को ज़िन्दगी में हज़ारों लोग मिलते हैं,किसी एक पर मर जाना अच्छा नहीं होता। अपनी चाहत को ख़ुदा बनाकर साँसें गिनते रहना,फ़िर गिन-गिन आँसू बहाना अच्छा नहीं होता। यहाँ दिलों की क़ीमत दौलत से लगाई जाती है,मुफ़लिस … Read more

माँ तेरा आशीष ही मांगूं

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ माँ तेरी हम सबको ज़रूरत है।जो मिला सब ही तेरी रहमत है। होशो-हवास होता कहाँ हमको,तू ही इस दुनिया की इबादत है। हम तन्हा जी सकते ही नहीं,माँ तुमसे ही हम सलामत है। अम्बे तू जगदम्बे तू,तू दुःख भंजनी,जो तुझे न माने उसे हिक़ारत है। माँ भारती हो या माँ दुर्गा हो,जीवन में … Read more

ज़िन्दगी एक अज़ाब

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ ज़िन्दगी एक अज़ाब बनकर रह गई।ख़्वाहिशों का ख़्वाब बनकर रह गई। हसरतों के दायरों में जी रहा था सच में,सैंडविच का क़बाब बनकर रह गई। मैं मैं न रहा अब तुम तुम ना रही,वक़्ती साँसों का हिसाब बनकर रह गई। दिन रात में कितना भी फ़र्क़ कर लूँ मैं,अंधेरों उजालों का जवाब बनकर … Read more