तुझे ही पुकारा है इन दिनों

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)********************************************************************  रचना शिल्प:वज़्न-२२१ २१२१ १२२१२१२ सबने ख़ुदा तुझे ही पुकारा है इन दिनों।तेरे सिवा न कोई सहारा है इन दिनों। अफ़सुर्दा महफिलों का नज़ारा है इन दिनों।तन्हाइयों का साथ गवारा है इन दिनों। आयी वबा तो साथ में क्या-क्या न ले गई,मैं क्या बयाँ करूँ जो ख़सारा है इन दिनों। … Read more

हमें जाँ से प्यारा हमारा वतन

प्रिया सिंहलखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************* हमें जाँ से प्यारा हमारा वतन है,इसी पे तो कुरबां मेरा जानों तन है। लहू दे के भारत को जिसने बचाया,निछावर अब उनपे मेरा तन-बदन है। न आये कभी तुझपे कोई मुसीबत,इसी के लिए सर पे बांधा कफन है। यहाँ भाई-भाई हैं हिन्दू मुसलमाँ,सभी दुश्मनों को इसी की जलन है। जो कुर्बान … Read more

ज़ाहिल मत बन

निर्मल कुमार शर्मा  ‘निर्मल’ जयपुर (राजस्थान) ***************************************************** आबाद सफ़ीनों की आमद से ही,तो होता है,कश्ती को नहीं ठिकाना दे,वो साहिल मत बन। जो उसका है,वो दे उसको,ये हक़ उसका है,देख के उसका झुका हुआ सिर,ज़ाहिल मत बन। गरचे है बूढ़ा शज़र,आब क्यों ना देता है,जिसके साये में पला,उसी का क़ातिल मत बन। ये वबा जानलेवा है,जोखिम … Read more

लेता वक्त फेरा है

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)********************************************************* क्यों ये मायूसियों का डेरा है,आने वाला नया सबेरा है। जो बुरा हो चुका वो जाने दो,वक्त पे लेता वक्त फेरा है। ये तो इस जिंदगी का आलम है,फिर उजाला है फिर अंधेरा है। सच सिखाया है साधु-संतों ने,कुछ न मेरा यहां न तेरा है। साँस लेते हैं हम इसी दम पर ,दिल … Read more

बाक़ी अभी‌ हैं खाइयाँ

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)***************************************************************** दरमियां बाक़ी अभी‌ हैं खाइयाँ।कह रही हैं चीख़ कर तन्हाइयाँ। मुल्क की खातिर बहा कितना लहू,सब भुला डाली गयीं क़ुर्बानियाँ। उनको अपने हुस्न पर बेजा गुरूर,हम भी हारे कब भला हैं बाज़ियाँ। दूरियों से प्यार कम होता नहीं,दूर दिल से कर सकीं कब दूरियाँ। कल ‘करोना’ काल में थीं … Read more

सबक एक मर्तबा दे दो

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)********************************************************* हाय,कोई उसे दवा दे दो,बेहया चीन को वफा दे दो। उसकी करतूत उसको मारेगी,ये सबक एक मर्तबा दे दो। उसको इंसानियत का कोई भी,एक छोटा-सा फलसफा दे दो । ‘कोरोना’ ला के खुद से हारा है,उसको एहसास ऐ खुदा दे दो। जो किसी का बुरा नहीं करता,इस वतन की उसे हवा दे दो॥ … Read more

दुश्मन को हमें जलाना आता है

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ********************************************************************** हमको सोये दरिया में तूफान उठाना आता है,लहराती लहरों पर भी पतवार चलाना आता है। जितने भंवर पड़ें दरिया में इसकी है परवाह नहीं,कैसा भी दरिया हो हमको डूब के जाना आता है। हम शेर जिगर मतवाले हैं कोई हमको न रोक सके,हमको संगमरमर में सुराख बनाना आता है। जितने भी … Read more

दर्द पर दर्द

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)********************************************************* जिंदगी रोप दी मैंने घने अभावों में,दर्द पर दर्द की मरहम लगाई घावों में। राह कोमल दिखी मुझको तमाम मंजिल तक,चल पड़ी तब लगा शीशे चुभे हैं पावों में। कुछ सवालों के हल निकले तो जिंदगी सँवरी,कुछ सवालात ही उठते रहे जवाबों में। तेरे ही हुक्म से होते हैं रात-दिन मेरे,मेरी हर साँस … Read more

धरती जगमगानी चाहिए

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)***************************************************************** फिर मुझे तेरी ज़बानी चाहिए।एक सुन्दर सी कहानी चाहिए। वाम दक्षिण हो चुका किस्सा बहुत,अब मईसत दरमियानी चाहिए। भूल कर किस्से पराजय के सभी,फिर से किस्मत आज़मानी चाहिए। देश की जब आन का हो मसअला,देश की इज्ज़त बचानी चाहिए। काल ‘कोरोना’ कभी जब खत्म हो,फिर से धरती जगमगानी चाहिए॥ … Read more

मुहब्बत भी ज़रूरी थी,बिछड़ना भी

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’मुंबई(महाराष्ट्र)****************************************************************** छिपा था नेह दिल में वो,निकलना भी ज़रूरी था।नयन में ख्वाब थे उनके,मचलना भी ज़रूरी था॥ चुनाचे ईद का मौसम,अगर महताब दिख जाए,छिपा बादल की चिलमन में,मगर दिखना ज़रूरी था॥ मुझे मालूम था हरगिज,कभी पूरे नहीं होंगे,मगर अरमान का मेरे,पलना भी ज़रूरी था॥ लगा था दाग दामन में,बड़ा ही बदनुमा-सा वो,भला लगता … Read more