न यूँ आजमाया करो

कृष्ण कुमार कश्यपगरियाबंद (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** (रचना शिल्प:२१२ २१२ २१२ २१२) तुम मुझे देख कर मुस्कुराया करो।इस तरह दिल में तुम आया जाया करो। हम तुम्हारे हैं आशिक,नहीं बेवफा,तुम हमेशा न यूँ आजमाया करो। बस जमाने से मुझको मिली ठोकरें,दिल न तुम भी मेरा यूँ दुखाया करो। दूर होगा तिमिर देखना एक दिन,दीप चाहत के गर … Read more

इस तरह दिल…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरीकुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** इस तरह दिल चुराने लगी,वो मुझे गुनगुनाने लगी। हो गयी क्या मुहब्बत उसे,गेसुओं को सजाने लगी। अश्क़ बहने लगे इश्क़ में,और वो मुस्कुराने लगी। जान लेकर मेरी क्या कहूँ,जान ही दूर जाने लगी। बात उसकी चुभी इस क़दर,शर्म तीरों को आने लगी। छोड़ ‘आकाश’ प्यासा मुझे, डुबकियाँ वो लगाने लगीll … Read more

…तो बिखर जाओगे

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)***************************************************************** बर्क़ रफ्तार से फिर तुम भी सुधर जाओगे।साथ जब नेक मिलेगा तो संवर जाओगे। सरकशी पर‌ है उतारू यहाँ की तेज़ हवा,एक होकर न रहोगे तो बिखर जाओगे। कारवां देर तलक फिर न रुकेगा हरगिज़,एक ही ठौर जो ता देर ठहर‌ जाओगे। शे’रगोई के उसूलों की ज़रा कद्र करो,बह्र … Read more

दिल भी बहलता नहीं है क्यों ?

कृष्ण कुमार कश्यपगरियाबंद (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** बहलाने से ये दिल भी बहलता नहीं है क्यों।वो बेवफा नज़र से उतरता नहीं है क्यों। दिल में मेरे ये बैठ के ग़म देता है सदा,बस जाये दिल में कोई निकलता नहीं है क्यों। जीना भी हो गया मेरा दुश्वार क्या करूँ,उस बेवफा का दिल भी पिघलता नहीं है क्यों। … Read more

ऐ सितमगर!

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)**************************************************** ऐ सितमगर! क्यों हमें अपना बनाया आपने।चैन मेरा इस कदर दिल का चुराया आपने। रात भर यादें तुम्हारी अब जगाती हैं मुझे-रोग चाहत का अज़ब कैसा लगाया आपने। टूटती अब जा रही हैं ख़्वाहिशें दिल की मेरी,बेवज़ह दिल को हमारे क्यों चुराया आपने। पास मेरे आपको आना न था तो क्यों … Read more

यही चाहते हैं

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)***************************************************************** दिलों को मिलायें यही चाहते हैं।वतन को सजायें यही चाहते हैं। न सच को छुपायें यही चाहते हैंlहक़ीक़त बतायें यही चाहते हैं। रियायत नहीं चाहते उनसे कुछ भी,न बेजा सतायें यही चाहते हैं। ये वादे सुनहरे बहुत सुन चुके हम,ज़मीं पर भी आयें यही चाहते हैं। नहीं भाषणों से … Read more

पैरों में छाले हैं

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरीकुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** सत्ताधीशों के हाथों में प्याले हैं,लेकिन लोगों के पैरों में छाले हैं। चलते-चलते चाहे कोई मर जाये,उनका क्या वे उड़नखटोले वाले हैं। वे नेता हैं जितना चाहें बोलेंगे,जनता के मुँह पर तो सौ-सौ ताले हैं। मज़दूरों का हाल नहीं देखा जाता,जो गोरे थे हो कर आये काले हैं। अब आकाश … Read more

फूल वो मुरझा नहीं सकता

प्रिया सिंहलखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************* (रचना शिल्प: बहर-१२२२ १२२२ १२२२ १२२२) मज़ा परदेश में क्या है उसे समझा नहीं सकता,सुकूँ जो घर में मिलता है कहीं वो पा नहीं सकता। सुनो ऐ बाग़बाँ गुलशन पे अपने तुम नजर रखना,ये मत समझो खिला जो फूल वो मुरझा नहीं सकता। बुढ़ापे की थकन कर लो जवानी में ज़रा महसूस,जो … Read more

कहर देखो

अनिल कसेर ‘उजाला’ राजनांदगांव(छत्तीसगढ़)********************************************************************* पानी का बरपा कहर देखो,बन गया पानी,जहर देखो। बादल बरसे हर तरफ ऐसे,हो गये सभी तर-बतर देखो। पेड़ काट-काट तुमने यारा,मौत का चुन लिया सफर देखो। वातावरण को किया है दूषित,वो ही आ रहा है नजर देखो। रोके से क्या रुकी जल की धारा ?बना के चाहे लोहे की नहर देखो। हँसते-हँसाते … Read more

तेरे तीर सब बेअसर जा रहे

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)********************************************************* निशाने नजर से किधर जा रहे हैं,तेरे तीर सब बेअसर जा रहे हैं। हमारा तो बंजारों वाला सफर था,वो समझे कि हम अपने घर जा रहे हैं। टिकी है हमारी नजर जिनके ऊपर ,वो हमसे हुये बेखबर जा रहे हैं। खता मैंने अपनी कबूली तो है फिर,खिलाफत मेें क्यों इस कदर जा रहे … Read more