आज भी वह तो लुटती है
गुरुदीन वर्मा ‘आज़ाद’बारां (राजस्थान)******************************** नारी और जीवन (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस)…. बनकर बाजार की वस्तु,वह हर रोज सजती है।मुजरे दरबार की रौनक,वह अक्सर बनती है॥ वह एक सेज होती है,नेता लोगों के घर की,वह एक प्यास होती है,नशा-ए-इश्क एक दिल की।दौलत वालों के लिए वह,सौदा नफा का करती है,बनकर बाजार की वस्तु…॥ रही पिंजरे में ही … Read more