साथ छूट जाते हैं…
डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* सुरों की अमर ‘लता’ विशेष-श्रद्धांजलि…. धीरज का बांध नहीं,तार टूट जाते हैं।सुर मलिका से हमारे,साथ छूट जाते हैं॥ शारदा साक्षात हुई थी,बन बैठी साधिका,सुर के श्रृंगार सजे,वह बन गई आराधिका।गीतों की झंकार गई,ताल टूट जाते हैं,धीरज का बांध…॥ मातु सरस्वती से हमें,अनुपम उपहार मिला,अद्भुत गीत बन गये तो,गीतों का सार मिला।परिभाषा थी … Read more