दशलक्षण पर्व:परिग्रह का त्याग कर खुद को पहचानें

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)********************************************** आज विश्व में हिंसा, युद्ध, अशांति, मार-काट, जमाखोरी आदि जो भी विसंगतियां हो रही, होती रही और भविष्य में भी होगी, उसका मुख्य आधार अधर्म है। मानव के रूप में जो दानव बैठे हुए हैं, जो नेता, अभिनेता ,संत-महंत जो भी हो, उनको धर्म का मर्म नहीं मालूम है। एक बार धर्म का … Read more

बिहार:नई पहल अधूरी, लेकिन बेहद सराहनीय

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने दल के मंत्रियों के लिए एक नई आचार-संहिता जारी की है, जो अधूरी है लेकिन बेहद सराहनीय है। इसलिए कि हमारे नेता ही देश में भ्रष्टाचार के सबसे बड़े स्त्रोत हैं। यदि उनमें आचरण की थोड़ी-बहुत शुद्धता शुरु होने लगे तो धीरे-धीरे भारतीय राजनीति का … Read more

विषम परिस्थितियों में कठोर श्रम से जीवन गढ़ा डॉ. कलाम ने

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* कभी-कभी समय की दीर्घ अवधि के बाद एक ऐसा मानव इस धरा पर आता है जो अपनी आभा, महिमा, शक्ति, ज्ञान, कौशल, प्रेम एवं दीप्ति को अपने साथ लाता है। इस प्रकार का मनुष्य सभी तुलना से परे होता है। वह स्वयं ही अपने वर्ग का होता है। कहते हैं … Read more

आत्मा को ज्योतिर्मय करने का पर्व

ललित गर्गदिल्ली************************************** उपवास और आराधना (पर्यूषण पर्व विशेष) पर्यूषण पर्व जैन समाज का ८ दिन का एक ऐसा महापर्व है, जिसे खुली आँखों से देखते ही नहीं, जागते मन से जीते हैं। यह ऐसा मौसम है जो माहौल ही नहीं, मन को पवित्रता में भी बदल देता है। आधि, व्याधि, उपाधि की चिकित्सा कर समाधि … Read more

कोरी गीदड़ भभकियाँ देने का उस्ताद चीन

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* अमेरिकी कांग्रेस (निम्न सदन) की अध्यक्षा नैन्सी पेलोसी की ताइवान-यात्रा पर सारी दुनिया का ध्यान केंद्रित हो गया था। न तो ताइवान कोई महाशक्ति है, न ही पेलोसी राष्ट्रपति है। फिर भी उनकी यात्रा को लेकर इतना शोर-शराबा क्यों मच गया ? इसीलिए कि, दुनिया को यह डर लग रहा था कि … Read more

राष्ट्रीयता की नब्ज के सच्चे पारखी ‘काका कालेलकर’

प्रो. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल )**************************** हिन्दी योद्धा:पुण्यतिथि विशेष…… गाँधी जी की प्रेरणा से अपने जीवन को हिन्दी की सेवा और उसके प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर देने वालों में काका कालेलकर का नाम पहली पंक्ति में रखा जा सकता है। उनका पूरा नाम दत्तात्रेय बालकृष्ण कालेलकर (१-१२-१८८५ से २१ अगस्त १९८१) है। वे हिन्दी के … Read more

त्याग-प्रेम के प्रतीक श्रीकृष्ण सच्चे अर्थों में राष्ट्रनायक

ललित गर्गदिल्ली************************************** जन्माष्टमी विशेष…. भगवान श्रीकृष्ण हमारी संस्कृति के एक अद्भुत एवं विलक्षण राष्ट्रनायक हैं। श्रीकृष्ण का चरित्र एक लोकनायक का चरित्र है। वह द्वारिका के शासक भी है किंतु कभी उन्हें राजा श्रीकृष्ण के रूप में संबोधित नहीं किया जाता। वह तो ब्रज नंदन है। समाज एवं राष्ट्र व्यवस्था उनके लिए कर्त्तव्य थी, इसलिए … Read more

हार मानने के बजाए सामना करना चाहिए

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विशेष… “जीवन में हार-जीत लगी रहती है, लेकिन सफलता सिर्फ उसी व्यक्ति को मिलती है जो अपनी गलतियों और हार से सीख लेकर आगे बढ़े। हारकर निराश होना किसी भी समस्या का हल नहीं है।” वर्तमान में श्रीकृष्ण की ऐसी शिक्षा की अत्यंत आवश्यकता है। कारण कि जो समस्याएं वर्तमान में … Read more

आजादी के नए जन्म का सुखद संकेत

ललित गर्गदिल्ली************************************** भारतीय स्वतंत्रता का एक नया दौर प्रारंभ हो रहा है या यूँ कहूं कि हमारी आजादी अब अमृत महोत्सव मनाने के बाद शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह लाल किले की प्राचीर से अपना गैर-राजनीतिक वक्तव्य देकर देश की जनता को जगाया, वहीं राजनीतिक दलों … Read more

सिर्फ तिरंगा फहराना काफी नहीं

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* आजादी के ७५ वें साल को मनाने के लिए हर घर में तिरंगा फहर रहा है, यह तो बहुत अच्छी बात है। भारत सरकार का यह अभियान इसलिए भी सफल हो गया है कि, इसे सभी दलों का समर्थन मिल गया है। यहां तक की कांग्रेस का भी! हालांकि, कांग्रेस दल के … Read more