‘सोने की चिड़िया’ रहे देश की संसद किस दिशा में..?

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** देश के लिए सब कुछ तय करने वाला सर्वोच्च सदन यानी संसद, जिसे देश की सबसे पवित्र और सबसे जिम्मेदार लोकतांत्रिक संस्था माना जाता है, उसी में ‘वन्दे मातरम्’ कके लिए बहस के नाम पर अगर १० घंटे तमाशे का अखाड़ा हो, तो सोचना लाज़मी है कि ‘सोने की चिड़िया’ रहा … Read more

उत्तर व दक्षिण भारत के भाषा-सेतु ‘सुब्रह्मण्यम भारती’

डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** ‘भारतीय भाषा दिवस’ (११ दिसंबर) विशेष… तमिल भाषा के सुप्रसिद्ध कवि महाकवि चिन्नास्वामी सुब्रह्मण्यम भारती (‘महाकवि भारतियार’) को भारत और भारतीय भाषाओं की एकात्मता के लिए याद किया जाता है। सुब्रह्मण्यम भारती का जन्म ११ दिसंबर १८८२ को तमिलनाडु के तूतुकुड़ी ज़िले के एट्टयपुरम् गाँव में हुआ। पिता चिन्नास्वामी अय्यर तमिल … Read more

कुछ रूमानी, कुछ सुहानी

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* ठंड की तासीर धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। पारा दिन-ब-दिन लुढकता ही जा रहा है। सुबह-शाम ठंड की चुभन बढ़कर रजाई लपेटने की चाह बढ़ती जा रही है। शहर की चारदिवारी से निकलकर इन दिनों मैं गाँव की ठंड महसूस कर रहा हूँ। बड़ा मजेदार अनुभव है-दिन में चमचमाती गुनगुनी-सी धूप … Read more

झुलसती संवेदनाएं और नाकाम व्यवस्था

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** एक बार फिर एक भीषण आग ने २५ मासूम जिंदगियों को छीन लिया। गोवा के नाइट क्लब में हुई यह त्रासदी केवल आगजनी नहीं, बल्कि हमारे तंत्र की जड़ता, गैर-जिम्मेदारी और नैतिक पतन की ज्वलंत मिसाल है। जो क्लब आग की चपेट में आया, वह नियमों की अनदेखी करके तो चलाया ही … Read more

पुतिन की भारत यात्रा से विश्व राजनीति की नई आहट

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा एक साधारण कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इतिहास के ७ दशकों में गढ़ी गई मित्रता का नवीन उद्घोष है। कहा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्थायी मित्र और शत्रु नहीं, स्थायी हित होते हैं, किंतु भारत-रूस संबंध इस कथन की परिधि से आगे जाकर … Read more

‘इंसानियत’ का बीज बदल सकता है दुनिया

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** ‘इंसानियत’ सुनने में एक शब्द है, लेकिन स्वयं के भीतर अनगिनत भावनाएँ समेटे हुए है। यह केवल किसी की मदद करना या दूसरों के लिए त्याग करना भर नहीं है, बल्कि इंसानियत वह ऊर्जा, अच्छाई और शक्ति है, जिसके सहारे समाज जीवित रहता है तथा दुनिया चलती है।कहना गलत नहीं होगा … Read more

नई परंपराओं का प्रारंभ बनना चाहिए संसद

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** भारत की संसद के शीतकालीन सत्र प्रारंभ होने से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने आने वाले दिनों में संसद की कार्रवाई के हंगामेदार होने का संकेत देने में देर नहीं लगाई। विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह एस.आई.आर. सहित कई मुद्दों पर जोरदार ढंग से सदन में अपनी … Read more

हमारे संस्कार हमारी धरोहर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* संस्कार और संस्कृति मानव जाति को सर्वश्रेष्ठ प्राणी बनाती है। ‌संस्कार सदैव परिवार में प्राप्त होता है। माता-पिता और परिवार के बुजुर्ग लोग बाल अबोध बाल हृदय को मिले संस्कार षोडश नये ज्ञान आचार विचारों से निमज्जित करते हैं। वे सन्तानों को नैतिक शिक्षा, सद्ज्ञान, रीति-रिवाज, परम्पराओं से परिचित … Read more

पाक: बौखलाहट पराजित मानसिकता का परिचायक

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** पाकिस्तान की भारत-निंदा की आदत कोई नई नहीं है;यह उसकी कूटनीति एवं संकीर्ण सोच का स्थायी चरित्र है। ऐसा शायद ही कोई अवसर हो, जब भारत की बढ़ती शक्ति, बढ़ती साख और सांस्कृतिक उन्नयन का प्रभावी दृश्य उभरे एवं पाकिस्तान उसमें संकुचित मानसिकता से भरी त्रासद टिप्पणियाँ न करे, विरोध का वातावरण … Read more

‘हिंदी में शपथ’ भाषाई चेतना का निर्णायक उद्घोष

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** भारत के ५३वें प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा हिंदी में शपथ लेना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में केवल एक औपचारिक घटना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, राष्ट्रीय और मनोवैज्ञानिक चेतना का नया शुभारंभ है। यह वह क्षण है जिसने भाषा को लेकर दशकों से चले आ रहे संकीर्ण विवादों, राजनीतिक विरोधाभासों और कृत्रिम विभाजनों … Read more