भारतीय ज्ञान परंपरा का दिव्य आलोक ‘शास्त्र’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मानव सभ्यता के विकास में ‘शास्त्र’ का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। शास्त्र केवल ग्रंथ नहीं, अपितु जीवन को दिशा देने वाले ज्ञान, अनुशासन, नीति, विज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के आधार स्तंभ हैं। भारतीय संस्कृति में शास्त्रों को ज्ञान का दिव्य स्रोत माना गया है। ‘शास्’ धातु से निर्मित … Read more

कृत्रिम बुद्धिमता : बढ़ते कदम, जिम्मेदारी सबकी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** कृत्रिम बुद्धिमता (ए.आई.) एक ऐसी तकनीक है, जो कम्प्यूटर और मशीनों को मानव सीखने, समझने, समस्या समाधान, निर्णय लेने, रचनात्मकता और स्वायत्तता का अनुसरण करने में सक्षम बनाती है।    ए.आई. से सज्जित एप्लिकेशन और उपकरण वस्तुओं को देख और पहचान सकते हैं। ये मानवीय भाषा को समझ सकते हैं। ये नई … Read more

घोषणा-पत्र की राजनीति पर लोकतांत्रिक लगाम आवश्यक

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति जनता का विश्वास है। चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं होते, बल्कि जनता और राजनीतिक दलों के बीच एक नैतिक अनुबंध भी होते हैं। जब कोई राजनीतिक दल चुनाव के समय घोषणा-पत्र जारी करता है, तब वह जनता के सामने अपने विचार, नीतियाँ और … Read more

राष्ट्रहित के आह्वान में भी राजनीति क्यों ?

ललित गर्गदिल्ली*********************************** आज पूरी दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं ने मानव सभ्यता को नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है। खाड़ी देशों में लंबे समय से चल रहे संघर्ष और युद्ध की विभीषिका ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे तक प्रभावित … Read more

बंगाल : बवाल, बगावत और बदलाव की बड़ी चुनौती

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** पश्चिम बंगाल की राजनीति ने ९ मई २०२६ को एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ देखा, जिसकी कल्पना कुछ वर्ष पहले तक कठिन मानी जाती थी। लंबे समय तक वामपंथी शासन और फिर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के बाद अब राज्य की सत्ता भारतीय जनता पार्टी के हाथों में … Read more

अदम्य साहस का प्रदर्शन किया था वीर सैनिकों ने

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)….           भारत की नारियों के लिए सिंदूर सम्मान और गर्व का प्रतीक है। जब इस सम्मान पर आघात हुआ, तो पूरे देश में दुःख और आक्रोश फैल गया। २६ अप्रैल २०२५ को हुए हमले में निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया। … Read more

श्रम की गरिमा और समाज की संवेदना

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. यदि हम मानवता के विकास का इतिहास देखते हैं तो एक सत्य निकाल कर सामने आता है कि संसार की प्रत्येक भव्य इमारत व प्रत्येक विकसित नगर और प्रत्येक सुविधा के पीछे मजदूरों का श्रम छिपा हुआ है। समाज का निर्माण केवल … Read more

महिला आरक्षण: राजनीतिक दलों का दोहरा चरित्र

ललित गर्गदिल्ली*********************************** भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है, कि जिस देश में महिलाओं को ‘शक्ति’, ‘मातृशक्ति’ और ‘आधी दुनिया’ कहकर सम्मानित किया जाता है, वहीं राजनीति में उन्हें समान भागीदारी देने के प्रश्न पर लगभग सभी राजनीतिक दलों की नीयत संदिग्ध दिखाई देती है। संसद से लेकर चुनावी मंचों तक … Read more

भारतीय सेना की सटीक रणनीति का जश्न है ‘आपरेशन सिंदूर’

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)…. जब कश्मीर में अमन-चैन की इबादत लिखी जा रही थी, सभी भाई-बंधु मिलजुलकर एकजुटता की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल प्रस्तुत कर रहे थे; ऐसे में दुश्मन पाकिस्तान के आतंकवादियों ने अमन-चैन को खत्म करने का दुस्साहस किया। वह भी तब, जबकि माँ भारती की … Read more

मासूम का करुण क्रंदन

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** यूक्रेन और रूस के बीच छिड़े युद्ध में राजधानी कीव में फंसी जूही अपने ३ महीने के बच्चे को अपनी छाती से चिपकाए हुए बैठी हुई थी। गरजती-बरसती मिसाइल और बम के धमाकों की आवाजों से वहाँ बैठे सभी लोगों के चेहरे पर भय और खौफ का आतंक छाया हुआ था। तभी धमाके की … Read more