विपक्षी दल भाजपा को मात देने में होंगे सफल ?

ललित गर्गदिल्ली************************************** नया वर्ष शुरु होते ही राजनीतिक दलों की सरगर्मियां भी नए मोड़ पर आने लगी हैं। क्योंकि इस वर्ष ९ राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं एवं अगले वर्ष लोकसभा के चुनाव। खास तौर से अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की … Read more

प्रकृति माँ को बचाओ

प्रो. लक्ष्मी यादवमुम्बई (महाराष्ट्र)**************************************** प्रकृति और खिलवाड़… आज से कई हजार वर्ष पूर्व हमारे देश के आचार्य और ऋषि-मुनियों ने प्रकृति से ही औषधियों की खोज की थी। पीपल, तुलसी, नीम आदि यह सब माँ प्रकृति की ही देन है। प्राचीनकाल में विज्ञान ने इतनी तरक्की नहीं की थी कि, हम बीमारियों को आसानी से … Read more

पर्यावरण सरंक्षण अति आवश्यक

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)***************************************************************** प्रकॄति और खिलवाड़… भारतीय मनीषियों ने बहुत पहले ही हमें समझा दिया था कि, जल, वायु, पृथ्वी, अग्नि और आकाश इन पाँचों तत्वों से ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है, जिसका सीधा अर्थ है कि, जंतु, पेड़-पौधे और हम मनुष्य सभी इन पंच-तत्वों के संयोग से ही पैदा हुए हैं। इसलिए … Read more

भारत में गरीबी-अमीरी की खाई

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* आजकल हम भारतीय लोग इस बात से बहुत खुश होते रहते हैं कि, भारत शीघ्र ही दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है, लेकिन दुनिया के इस तीसरे सबसे बड़े मालदार देश की असली हालत क्या है ? इस देश में गरीबी भी उतनी ही तेजी से बढ़ती जा रही … Read more

कौन है दोषी ?

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* प्रकृति से खिलवाड़… सुरंग विकास परियोजना से कई वर्ष पहले अधिकतर लोग पहाड़ों पर पर्यटकों को आकर्षित करने व रोजी-रोटी के लिए बस गए। इन लोगों ने बिना सरकारी अनुमति लिए पहाड़ों के सबसे निचले हिस्से में सबसे पहले अपने अस्थाई घर बनाने आरंभ किए। धीरे-धीरे एक दूसरे की देखा-देखी से … Read more

भाषा, संचार और ज्ञान को चाहिए औपनिवेशिक सोच से मुक्ति

डॉ. गिरीश्वर मिश्र,गाजियाबाद(उत्तरप्रदेश)********************************************* भारत की भाषिक विविधता का अद्भुत विस्तार और उसका सहज स्वीकार प्राचीन काल से इस देश में सामाजिक बर्ताव का अहम हिस्सा रहा है। इस विविधता को ध्यान में रख कर अक्सर भारतवर्ष को भाषाओं की एक विलक्षण प्रयोगशाला भी कहा जाता है।ऐतिहासिक रूप से अथर्ववेद के मंत्र ‘जनं विभ्रती बहुधा विवाचसं … Read more

रोका जाए बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता को

ललित गर्गदिल्ली************************************** बच्चों के प्रति समाज को जितना संवेदनशील होना चाहिए, उतना नहीं हो पाया है। कैसा विरोधाभास है कि, समाज, सरकार और राजनीतिज्ञ बच्चों को देश का भविष्य मानते नहीं थकते। फिर भी उनकी बाल-सुलभ संवेदनाओं को कुचला जाना लगातार जारी है। बच्चों के प्रति संवेदनहीनता को सिर्फ जघन्य अपराधों में ही नहीं देखा … Read more

जहर कभी अमृत नहीं बन सकता

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** शराब से केंद्र और राज्य सरकारों को राजस्व-आय होने से शराब पर पाबन्दी नहीं लगा सकती है। इसके कई फायदे सरकार को हैं-राजस्व, अस्पताल, चिकित्सक, दवाई झगड़ा, हत्याएं, पुलिस, वकील, कर्मचारी आदि को शायद काम मिलता है। पेट्रोल, रेलवे, बस को भी फायदा होता है। सरकार को शराब देश हित में जरुरी भी … Read more

जन-संवेदना का प्रतिनिधित्व करती एकमात्र भाषा हिंदी

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* हिन्दी की बिन्दी… हमारे राष्ट्र व जन-संवेदना का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र भाषा है हिंदी। देश के २९ राज्यों व ८ केंद्रशासित जनसमुदाय की भाषा और बोली है। भाषा सदैव अपने समकालीन जन-जीवन में उत्पन्न होने वाले विचारों को प्रेषित करती है, और नए-नए रूपों को अपनाते हुए विकसित होती है। … Read more

संकल्प और दल रोक सकते हैं बदजुबानी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुनाया है कि कोई मंत्री यदि आपत्तिजनक बयान दे दे, तो क्या उसके लिए उसकी सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है ? यह मुद्दा इसलिए उठा था कि आजम खान नामक उ.प्र. के मंत्री ने बलात्कार के मामले में काफी आपत्तिजनक बयान दे … Read more