हिन्दी ज्यादा से ज्यादा बोली जाए और प्रचार हो

प्रो. लक्ष्मी यादवमुम्बई (महाराष्ट्र)**************************************** हिन्दी की बिन्दी… मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, वह समाज में रहकर ही जीवन यापन करता है, समाज में रहकर अपने कार्य को करता है। जीवन-यापन करने के लिए कुछ न कुछ कार्य अर्थात व्यापार, रोज़गार या काम करता है। एक-दूसरे की मदद से व्यापार करते हैं, सहकार करते हैं। इसी … Read more

हिंदी की बिंदी का मजाक

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** हिंदी की बिंदी… हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग १९२० से चल रही है, जिसकी शुरुआत महात्मा गाँधी द्वारा की गई थी, जो सौ वर्ष बाद भी झूला झूल रही है। हिंदी बोलने वालों की संख्या वास्तव में बढ़ गई है, हाँ पर हममें से कितनों के बच्चे हिंदी माध्यम से पढ़ रहे … Read more

विश्वभाषा की ओर हिन्दी अग्रसर

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)***************************************************************** अमरावती में जन्मे गुणाकर मुले ने ‘भारतीय लिपियों की कहानी’ लिखी। उसमें उन्होंने लिखा कि, जिस लिपि में यह पुस्तक छपी है, उसे नागरी या देवनागरी लिपि कहते हैं जो लगभग २५० वर्ष पहले बनी। इसका विकास होने से अक्षरों में स्थिरता आ गई।देवनागरी लिपि में मुख्यतः गुजराती, नेपाली, मराठी, संस्कृत, … Read more

विदेशी शिक्षण संस्थानों को न्यौतना खतरा न बने

ललित गर्गदिल्ली************************************** नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा घोषित नई शिक्षा नीति की उपयोगिता एवं प्रासंगिकता धीरे-धीरे सामने आने लगी है। आखिरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति की शुरुआत करतेे हुए डिजिटल विश्वविद्यालय के शुरू होने और विदेशों के उच्च स्तरीय लगभग ५०० श्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थानों के भारत में परिसर खुलने शुरु हो जाएंगे। … Read more

धन का सदुपयोग करें

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** कुछ लोगों ने धर्म के मर्म को न समझते हुए धन को हाथ का मैल, लक्ष्मी को चंचला आदि कहकर लक्ष्मी का इतना अपमान किया कि लक्ष्मी असुर प्रवृत्ति वाले लोगों के हाथों में चली गई और धर्मात्मा व्यक्ति कंगाल होते चले गए। ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाली कहावत चरितार्थ हुई और … Read more

११५ साल के विद्यालय में हर साल विदेशी आते हिंदी सीखने

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** उत्तराखंड मसूरी के पास बसे लंडौर के पास बने विद्यालय में आपको हिंदी सीखने वाले ‘आगे-आगे, पीछे-पीछे, ऊपर-ऊपर, नीचे-नीचे, पास-पास, दूर-दूर’ यह गाना गुनगुनाते हुए कई विदेशी चेहरे दिख जाएंगे। गाना गाकर हिंदी सिखाने वाला यह देश का सबसे पुराना और अनोखा भाषा विद्यालय है। वैसे तो, इसमें हिंदी के अलावा पंजाबी, … Read more

शिक्षा, सुन्दरता और सम्मान के बदलते मानक

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** आज आधुनिकता के दौर में शिक्षा का गुणांक अच्छे अंक प्राप्त करना, सुन्दरता का मापदंड बाह्य रंग-रूप तथा सम्मान का मानक पैसा हो गया है।यही पश्चिम की सोच थी कि, भारतीय लोग अपनी संस्कृति के परम भाव से बाहर निकल जाएं, ताकि उनकी सुरक्षात्मक आधारभूत विश्वास और नैतिकता प्रिय शक्ति टूट … Read more

भारत जोड़ोःखाली झुनझुना

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* राहुल गांधी के पास यदि भाजपा का कोई वैकल्पिक राजनीतिक दर्शन होता तो देश के समस्त विरोधी दलों को एक सूत्र में बांधा जा सकता था। खुशी है कि आज राहुल गांधी ने इसी बात को दोहराया है। उन्होंने अपनी भारत-यात्रा के दौरान कहा है कि भाजपा को हराने के लिए विरोधी … Read more

बीते ३ सालों में बहुत सीखा

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)***************************************************************** वैसे तो बीते वर्ष २०२० से २०२२ तक हमने मानसिक तनाव बहुत झेला है। यह मानसिक कष्ट अनेक कारणों से रहा, जिसमें प्रमुख चीन-पाकिस्तान के साथ युद्ध का भय व ‘कोरोना’ महामारी व बाद वाले प्रभाव रहा, परन्तु सभी यह भी जानते हैं कि हमारी सरकार ने चीन व पाकिस्तान दोनों … Read more

नए वर्ष में उगाएं संकल्प के पौधे

ललित गर्गदिल्ली************************************** नया उजाला-नए सपने… नए भारत एवं सशक्त भारत को निर्मित करने के संकल्प के साथ नए वर्ष का स्वागत करें। हम इस सोच और संकल्प के साथ नए वर्ष में प्रवेश करें कि हमें कुछ नया करना है, नया बनना है, नए पदचिह्न स्थापित करने हैं। बीते वर्ष की कमियों पर नजर रखते … Read more