मुफ्तखोरी रोग
संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** मुफ्तखोरी इंसान को,कर देती लाचारमुफ्तखोरी का माल खा कर,नहीं सुधरते उसके आचार। ‘मेहनत’ शब्द को आलसी इंसान,राष्ट्र के विकास को ले जाता गर्त मेंराहें नहीं सूझती विकास की,मुफ्तखोरी के चक्कर में हो जाता दृष्टिहीन। राष्ट्र के विकास के गिर जाते तम्बू,मेहनतकश इंसान भीमुपतखोरी के चक्कर में,हो जाते पंगु॥ परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक … Read more