बोलो न, बता दो

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** जाते-जाते क्यों थमते हो ? बोलो न बता दो,कहते-कहते तुम रुकते हो, बोलो न बता दो। उम्मीदों की बांध पोटली, यूँ न बुदबुदाना,दाम पोटली का कुछ हो तो, बोलो न बता दो। दर्द हो तो दे दो मुझको, उसे रुलायेंगे,या आँखों में प्रेम कैद है, बोलो न बता दो। झुकी-झुकी नजरों से … Read more

जीवन सीख न पाते

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* रचनाशिल्प:मुखड़ा-१६,१२ मात्राओं की यति पर २८ मात्रा के २ पद। प्रत्येक पद में १२ मात्राओं का टेक। अंतरा-२८ (१६+१२) मात्राओं के ३ पद। फिर १२ मात्राओं का टेक। धरती, अम्बर, नदियाँ, सागर, धीरज गुण अपनाते।धीरज गुण अपनाते…।देखें समझें फिर भी गुण ये, जीवन सीख न पाते।जीवन सीख न पाते॥ हर … Read more

शपथ लें सब मिलकर

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** ‘राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस’ (१४ दिसंबर) विशेष… आज मनाने हम निकलेंगे, एक नया दिवस,देश मनाता है इसे ‘राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस’शपथ लें सब मिलकर, ऊर्जा की बचत हो हर दिवस,न फालतू प्रयोग बेवजह, न हो दुरुपयोग दिन दिवस। हमेशा जागरूक रहें, करें ऊर्जा का संरक्षण,फिजूल ऊर्जा न नष्ट हो, करें … Read more

ओ मेरे प्रतीक्षित मीत

सुनीता रावत अजमेर(राजस्थान) ******************************************* हर किसी के भीतर,एक गीत सोता हैजो इसी का प्रतीक्षमान होता है,कि कोई उसे छू कर जगा देजमी परतें पिघला देऔर एक धार बहा दे…। पर ओ मेरे प्रतीक्षित मीत,प्रतीक्षा स्वयं भी तो है एक गीतजिसे मैंने बार-बार जाग कर गाया है,जब-जब तुमने मुझे जगाया है…। उसी को तो आज भी गाती … Read more

आनन्द की अनुभूति

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** क्या कहते हो, ध्यान में बैठना मुश्किल है ?मन चंचल आँख बंद करते ही इधर-उधर भागता है ?देखो, आरंभ में उदासी लगेगी, लगने देना,थोड़ी उलझन परेशानी लगेगी, लगने देना,बस पाँच मिनट चुपचाप एकांत में बैठना,धीरे-धीरे समय थोड़ा बढ़ाना, अच्छा लगेगा,न कुछ सोचना-न कुछ बोलना, न कोई मंत्र पढ़ना,कुछ नहीं करना है, चुपचाप … Read more

जुगनू हैसियत

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* समझो जुगनू हैसियत, गहन अमावस रात।छिपते जलते रातभर, सुख-दु:ख बन सौगात॥ परनिन्दा औषधि समझ, दिग्दर्शक सोपान।जुगनू बन आलोक दे, निन्दक प्रभु वरदान॥ हरित पौध पादप कुसुम, चहुँ दिशि खिला निकुंज।सावन पहली बारिशें, फैली जुगनू पुंज॥ नव रंगों से है सजा, आया फागुन मास।इतराती रति रागिनी, इठलाती मृदुभास॥ बन जुगनू … Read more

ओ ऊपर वाले

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** मुफ्तखोरी और राष्ट्र का विकास… ओ ऊपर वाले,बंद करवाओ ये मुफ्त की रेवड़ी बाँटनाये सहायता गरीबपन को दर्शातीदेश-विदेश में छवि पिछड़ापन लाती है। मुफ्त का माल देती,कर में वृद्धिबह जाती गरीब की नाव,उत्पादन कोख उजाड़ती जातीइससे भूखे मरने की नौबत आती,सरकार मेहनती इन्सान को आलसी बनाती। इससे ही से तो विकास की … Read more

आम से ख़ास हो गया

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* छूटा है बहुत कुछ, सुहाना सफ़र,दिलकश नज़ारे, घर, परिवारटूटा है अंतर्मन कुछ नया पाने के बहाने,बदल गए जीवन के पैमाने। सहज सरल जीवन में,बेड़ियाँ ऐसी कस गईसुबह से रात तक दिनचर्या,चौकस और तेज़ हो गई। लोगों के साथ उठना-बैठना,दूभर हो गया, एक पल में जबइंसान आम से ख़ास हो गया,अपनों से … Read more

युद्ध का शोला धधक रहा

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** हर तरफ देखो सबका वतन जल रहा है,बांग्लादेश, यूक्रेन, सीरिया, इजराइल जल रहा हैकहीं धर्म, कहीं अधर्म, कहीं घर जल रहा है,मानवीय मूल्यों का रहमो-करम जल रहा है।भ्रष्ट आचरण, धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी में सारा मुल्क जल रहा है,आर्थिक महाशक्ति, अणु शक्ति होड़ में विश्व जल रहा हैआधुनिक हथियार, कालाबाजारी में दंगा … Read more

मैं तुझसे प्रीत लगा बैठी

सुनीता रावत अजमेर(राजस्थान) ************************************************************* तू चाहे चंचलता कह ले,तू चाहे दुर्बलता कह लेदिल ने ज्यों ही मजबूर किया,मैं तुझसे प्रीत लगा बैठी। यह प्यार दीए का तेल नहीं,दो-चार घड़ी का खेल नहींयह तो कृपाण की धारा है,कोई गुड़ियों का खेल नहीं।तू चाहे नादानी कह ले,तू चाहे मनमानी कह लेमैंने जो भी रेखा खींची,तेरी तस्वीर बना बैठी। … Read more