खूबसूरत इश्क़

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* हो अगर इश्क़ खूबसूरत तो, फिर क्यों ना मुस्कायें।दिल अगर दिल से मिल जाए, तो फिर क्यूँ न मुस्कायें।। इस दुनिया से मैं टकरा जाऊँ, तुम्हारी खातिर,चाहे चाल चलें गहरी लोग, इस दुनिया के शातिर।तुम प्यार करो मुझसे, अब तो फिर क्यूँ न मुस्कायें,हो अगर इश्क़ खूबसूरत…॥ इस खूबसूरत इश्क … Read more

आरोप-प्रत्यारोप

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** कहना तो बहुत कुछ है अगर कहने पे आऊँ,पर सोचती हूँ कहने से क्या होगा ?कभी सोचती हूँ कम से कम मन का आक्रोश कुछ तो कम होगा,हर समय हमारे जीवन में आरोप- प्रत्यारोप का दौर चलता ही रहाएक झुकता रहा, दूसरा झुकाता ही रहा,पर झुकने की भी एक सीमा होती हैतुम … Read more

हम न रहे तो…!

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** तितली के पंख से,रंग निकलातितली हुई दुखी,तितली ने फूलों से की दोस्तीपराग ने तितली से। किसी ने मुझे पकड़ लिया था,इसी कारण मुझमें रंग नहींमैं तितली हूँ,उड़ना जानती तो बच गईफूल, भँवरे और मैं,उपवन की शोभा है। यदि हम ना रहे तो,गीत अधूरे, सौंदर्य अधूराउपवन अधूरा,फूल हमारा रास्ता देखतेवे हमारे लिए नित्य,पराग … Read more

ऐसे दीप जलाएँ हम

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** अँधियारा मिट जाए, ऐसे दीप जलाएँ हम।सब ख़ुश हो जाएँ, ऐसे समरस हो जाएँ हम॥ छोड़ दें अब तो लालच का साया,स्वार्थ से कभी क्या कुछ मिल पाया।जरा दुश्मन को भी दोस्त बनाएँ हम,अँधियारा मिट जाए, ऐसे दीप जलाएँ हम…॥ देश का सोंचे, सदा बलिदान करें,प्रेरणा बनें, नारी का सम्मान करें।मन-आँगन में … Read more

करूँ प्रार्थना आपकी

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)****************************************************** श्री शिवाय नमस्तुभ्यम… हर पल तेरा साथ हो, शिव शंकर नटराज।करूँ प्रार्थना आपकी, सफल बने हर काज॥ सफल बने हर काज मम्, जय हो भोलेनाथ।आया हूँ तेरी शरण, करना शिव परमार्थ॥ करना मम् परमार्थ शिव, मैं हूँ दीन अनाथ।बालक मुझको जानकर, रखना सर पर हाथ॥ रखना सर पर हाथ प्रभु, … Read more

रास्ता कोई भी हो

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* रास्ता कोई भी हो, बस संकल्प लक्ष्य दृढ़ चाहिए,विश्वास अन्तर्मन हो अटल, आश्वस्त श्रम फल चाहिए। निर्मल सदा श्रमजीवी चरित, रण संयम महारथ चाहिए,सुदृढ़ मनोबल सत्पथ निरत, धीरज साहसी क्यूँ हठ चाहिए। उद्देश्य से श्रम परिपूरित हो, सुमति विवेक सारथ चाहिए,हो उल्लास हियतल तीव्रतम, इच्छाशक्ति प्रबलतम चाहिए। रास्ता कोई … Read more

परिवार को सजा लो

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* रचनाशिल्प:२ २ १ २ १ २ २ २ २ १ २ १ २ २…. परिवार को सजा लो, संसार भी सजेगा।अभिसार जिन्दगी को, ‘रब’ से यहीं मिलेगा॥ हम बन्दगी निभा के, हर ज़िंदगी सजा लें,सारे जहान की हम, संजीदगी दिखा दें।संजीदगी दिखा दें…गुजरे हुए समय का, सम्मान भी रहेगा,थी ज़िंदगी … Read more

स्वयं को लिख रही

सरोजिनी चौधरी, जबलपुर (मप्र)
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विगत दिनों को आमंत्रित कर,
जीवन का इतिहास लिख रही
यादें कोई छूट न जाएँ,
स्वयं को ख़ुद से आज लिख रही।

लिया एक दीपक हाथों में,
यादों से जो भरा हुआ था
उसकी उज्ज्वल ज्योति में मेरे,
सपनों का सुख छिपा हुआ था।

आशाओं से भरी हुई थी,
यौवन के क्षण-क्षण की बातें
कुछ पल अपने ख़ास बहुत थे,
होती थीं जब प्यार की बातें।

कुछ मस्ती और ख़्वाब की बातें,
कुछ खट्टी-मीठी सी यादें
कुछ पल तेरे नाम किए थे,
वे मेरी अपनी सौग़ातें।

आशाएँ कुछ अधिक नहीं थीं,
फिर भी मुश्किल सदा बड़ी थी
एक समस्या मैं हल करती,
दूजी आ कर खड़ी हुई थी।

बीता बचपन यौवन बीता,
प्रौढ़ावस्था में जब आयी
जिसे निभाना साथ था मेरा,
उसकी ही हो गई बिदाई।

भ्रमित अवस्था थी मेरी तब,
सोचूँ किधर-कहाँ जाऊँ!
पत्थर-सी बन गई थी मैं तब,
कहाँ रोशनी मैं पाऊँ?

पठन किया साहित्य का मैंने,
कई पुस्तकें पढ़ डालीं
मन के दर्पण में मैंने तब,
भावी छवि निर्मित कर डाली।

प्रथम स्थान कर्म को देकर,
भावी जगत किया तब कल्पित।
निखिल विचार विवेक तर्क सब,
भावी कर्म को किया समर्पित॥

 

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कुसुम कली

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* कुसुम कली-सी खिलने दो माँ,पँछी बनकर होने दो माँजन्म मेरी माँ देदो मुझको,इस धरती पर, इस अम्बर पर। पापा मैं हूँ बिटिया प्यारी,अंश आपका हूँ पर नारीइसीलिए भ्रूण हत्या जैसा,यह अपराध किया क्यों भारी ? माँ की ममता की मिसाल तो,पूरे जग ने सदा से दी हैफिर क्यों इतनी क्रूर … Read more

कैसे सुनाऊँ ग़म ?

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** किसको कैसे सुनाऊँ गम ?रही न अब कोई उमंगदुनिया है आपके पैसे संग,हर व्यक्ति में अलग है रंगकितना बदल गया है ढंग।आधुनिकता ने किया बदरंग,गिरगिट से तेज बदलते रंग बहुरूपियों-सा चरित्र बदरंग,जीवन सुंदरता की कहाँ तरंग अजीब दुनिया सब पर व्यंग्य।ढूंढता हूँ दिल मिलती सुरंग,अब कहाँ बच्चे माँ-बाप संग!डरते मेरे … Read more