उड़ा दिए लाखों
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* उड़ा दिए लाखों महफ़िल में चले लूटने भौतिक मस्ती,भूले दुर्लभ जीवन पथ को, विरत जज्बातों में कर गस्ती। कर्त्तव्यों से विरत निर्वहन, पैसों की कीमत है सस्ती,मदमाते मदमस्त नशीले, चाहे दुनियाँ उन पर हँसती। उड़ा दिए लाखों सरगम में, विस्मृत कुल मर्यादित हस्ती,अर्जित पूर्वज दौलत महफ़िल, लुटा रहे नित … Read more