तू तो बस मन की गाथा
कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ कैसे करूँ मैं तेरी व्याख्या!कैसे कहूँ मैं तेरी कथा! तू तो बस मन की गाथा,तू तो बस आँखों का आँसू। झरने जैसे बह निकले,तुम आँखों की गलियों से। शब्द-शब्द भी जोडूं तो,तुम ना मिले मेरे मन में। जब भी याद आते हैं वह,पर आँखों से तुम बहते हो। गोद में तेरे सिर … Read more