घोर प्रदूषण
डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* फैल रहा चहुँ और, जगत में घोर प्रदूषण।प्रतिदिन बढ़ते रोग, मिटे यह जीवन प्रति क्षण॥दोहन करता नित्य, मनुज कुदरत का जग में।मारे तीक्ष्ण कुठार, स्वयं ही अपने पग में॥ भौतिकता की होड़, मची है जीवन के रण।मनुज आज बेहाल, सृष्टि में दूषित कण कण॥जल थल नभ अरु वायु, प्रदूषित है जग … Read more