सर्दियों की सुबह
दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* सुबह सर्दियों की,थोड़ी अलसाई-सीनरम धूप की चादर ओढ़े,ज्यों नींद में मुस्काई-सी। कोहरे के आगोश में शहर,छाई है धुंध-सीओस की बूँदें फूलों पर,चमकती हीरे-सी। रजाई से झांकती आँखें,सपनों में उलझी-सीसर्द हवा के झोंके,छेड़ें कहानी कुछ सिहरन-सी। चिड़ियों की हल्की चहचहाहट,देती सुबह की दस्तक-सीगलियों में कदमों की आहट जैसे,ठंड से करती समझौता-सी। छत पर … Read more