निकली टोली

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** मकर संक्रांति पर्व है आया,घर-घर खुशियाँ खूब लाया। बच्चों की निकल गई है टोली,मांग, घर-घर लोहड़ी टोली। मूंगफली, रेवड़ी संग मिठाई,लोहड़ी गाते, मंगल बधाई। पैसे, आशीष पूर्वज बांटे,नाना-नानी प्रेम, बुलाते। दिन की अवधि थोड़ा सरके,सर्द हवाएं हौले-हौले सरके। सूरज मानो रजाई ओढ़े,बचकर सर्दी दुबक कर बैठे। घी, दूध, खिचड़ी, तिल … Read more

परवाह नहीं है मुझको

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** परवाह नहीं है मुझको,चाहे जैसे भी हों हालातमाँ श्यामा माई की कृपा से,बन जाती है हर बात…। शिशु सकल जगत है,जगत जननी वही हैं सबकी मातममतामयी हैं आँचल जिनका,लुटाती हैं स्नेह की सौगात।माँ श्यामा माई की कृपा से,बन जाती है हर बात॥परवाह नहीं है मुझको… मुँह फेर कर जब अपने,निभाना छोड़ … Read more

सदैव आजाद ‘नेताजी’

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** सदैव आज़ाद, हिन्द क्रांतिवीर ‘नेताजी’ सुभाष,गुलामी से आज़ाद, कांग्रेस से आजाद योद्धा सुभाषजापान में भारतीय कैदी किए आजाद संग्रामी सुभाष,“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” नेताजी सुभाष। २३ जनवरी १८९७ को कटक में जन्मे नेताजी सुभाष,माँ प्रभा देवी, वकील जानकीनाथ बोस के पुत्र सुभाषप्रेसीडेंसी कॉलेज, कैंम्ब्रिज विश्वविद्यालय … Read more

आँसू और खामोशी

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** आँसू जब भीआते हैं,मन को हल्काकर जाते हैं। दिल का गुबारनिकल आता है,मन शांतहो जाता है। कभी खुशी केआँसू होते हैं,कभी गम केआँसू भी होते हैं। दिल के अरमानआँसुओं में बह जाते हैं,हम खामोशी मेंरह जाते हैं। आँसू और खामोशीका घना नाता है,आँख से आँसूखामोशी में ही आता है। … Read more

पहाड़ों का सपना

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* शाम सिंदूरी-सिंदूरी अर्क में डूबीनहला रही है पहाड़ों को,दिनभर सूर्यस्नान किए पहाड़ सन गए हैंसिंदूरी वर्ण के रक्तिम फाहे सेपश्चिम की देहरी पर पसरता जा रहा है,सिंदूरी-सिंदूरी संसार। घुंघरू बाँधकर संध्या ठिठकी-ठिठकी-सी,घूम रही है पहाड़ों के इर्द-गिर्दमैं सुन रहा हूँ कदम-कदम पर पड़ती,घुंघरुओं की खनक। पाँवों में अलता लगाकर हौले-हौले पड़ते,पदचापों … Read more

करें ‘मौन’ अर्पित

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** मौनी अमावस्या (१८ जनवरी) विशेष… ‘मौन’,शक्तिशाली माध्यमटाल देता संघर्ष,बहुत जरूरीहथियार। ‘मौन’,हटाता नकारात्मकताबढ़ाता धैर्य, मजबूती,एकाग्रता दिखतीसुनिर्णय। ‘मौन’,रखना चाहिएहोता बड़ा फायदा,समझ आताभविष्य। ‘मौन’,मुस्कान जादूगरदिलाती अक्सर सफलता,समझना होगाजीवन। ‘मौन’,है शांतिशब्द अभाव नहीं,है तपबुद्धिमता। ‘मौन’,महत्ता समझिएप्रेरणा है सघन,अवसर पावनआध्यात्म। ‘मौन’,साधना है,है आध्यात्मिक यात्राकड़ा अनुशासनचेतना। ‘मौन’,एक अंतर्भाषासीधे आत्म संवाद,कड़ा उपदेशसिद्धियाँ। ‘मौन’,उच्चतम शिखरथमता मन-तरंगें,सौन्दर्य ज़िंदगीऊर्जा। ‘मौन’,शक्ति संचयदिशा, … Read more

उँगलियाँ

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** उँगलियाँ किसी पर भी उठा देते हैं लोग बस,बात को बातों में ही, उड़ा देते हैं लोग बस। चाय में डालकर अखबार को भी पी जाते हैं,मुद्दा कोई गुफ्तुगू का जुटा लेते हैं लोग बस। अगर अपने आँगन में जलाने को दीया नहीं,तेल दूजे के घर का भी चुरा लेते हैं … Read more

सूरज सोया ओढ़ रजाई

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** वृक्ष-पात से नीर झरे,धुंध ही धुंध दिखाई पड़ेहाड़ कम्पाती ठंडक आई,सोया सूरज ओढ़ रजाई। बोला अब ना निकलूंगा,अब करना मुझे विश्रामचलते-चलते थक जाता हूँ,पहर और आठों याम। सुन माँ अदिती दौड़ी आई,प्यार से कुछ बातें समझाई।उठ जा बेटा फेंक रजाई,समझ जरा तू पीड़ पराई। देख धरा पर कैसी हलचल,जीव-जंतु सब हो रहे … Read more

संकल्प को सफल बनाना है

वंदना जैनमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)…. विस्तृत गगन को नाप कर छोटा-सा बनाना है,स्वर को मुखर और संकल्प को सफल बनाना है। पतझड़ को झाड़ कर बसंती छटा को बिखर जाना है,राह कंटकों को पराजित कर लक्ष्य को पा जाना है। संघर्ष से तपती देह को शीतल चाँदनी में लेटाना … Read more

भारत का दिव्य पुत्र

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ एक ही कार्य हाथ में लो, उसे करके दिखलाओ,कष्ट चाहे जितने भी आए, देश का मान न मिटाओ। मन किया शिव व्रत जन्म लिया, बालक देवत्व।नाम नरेंद्र दत्त था, माँ का था वह बड़ा दुलारा। भटकते-भटकते मिल ही गए गुरु महान,इंतजार में बैठे रामकृष्ण परमहंस काली के दरबार। गुरु दिए भरपूर ज्ञान, … Read more