जीते जी मृत होना
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जीते जी मृत होना यही, जब कर्म शून्य हो प्राण है,आलस्य की तिमिर छाया में, गलती जीवनी पहचान है।भौतिक मृगतृष्णा माया में, उलझे है पल-पल हर श्वांस-चलती-फिरती बनी लाश वे, भूले आस्था मनुज गान है॥ अकर्मण्यता ही अपमान है, मानवता का क्षय मसान है,कर्तव्यों से विमुख हुआ जो, उसका … Read more