आन बसे क्यों नदी किनारे ?

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************** मिट्टी का घर कांप रहा है,पानी ढो-ढो थके पनारे।तीखी वर्षा के हमलों से,रोते पाये छान उसारे॥ दुश्मन दिखती तेज हवाएं,बरखा अब दहशत फैलाये,धरती पर पानी ही पानी,डूबे गाँव गली चौबारे॥ नदी क्षेत्र में गाँव हमारा,नीची बस्ती तरफ किनारा,रूह कांपती देख देख कर ,नदिया खड़े हिलोरे मारे। आले-खिड़की सब गीले हैं,गद्दे बिस्तर … Read more

अपना-पराया

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ कौन अपना है कौन पराया।कोई ये कभी जान न पाया। मुहँ के सामने मीठी बातें,पीठ पर ख़ंजर चलाया। सुबूत दे तो कैसे दें ख़ुदा,इन झूठों ने मुझे फँसाया। मेरे घर में घुस मुझे ही लूटा,जिस पर फ़र्जन का दिल है आया। अंधा गूंगा बहरा प्यार नहीं जानता,उसे किस नागिन ने है भरमाया। जब … Read more

हमसे मोहब्बत नहीं है

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ किसी को किसी के लिये फुरसत नहीं है।हमें भी बातें करने की तो आदत नहीं है। तन्हाई में गुज़र गये सालों पर साल कई,किसी अपने को हमसे मोहब्बत नहीं है। खून का रिश्ता पराई आग में जल जाता है,आज़कल सच्ची माँ से मार्फ़त नहीं है। माँ ने पाला जिसे कलेजे से लगाकर,माँ को … Read more

मुझे मत यूँ सताओ तुम

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचनाशिल्प:क़ाफ़िया-आओ,रदीफ-तुम, बहर १२२२,१२२२,१२२२,१२२२ मिरे जज़्बात को समझो मुझे मत यूँ सताओ तुम,रहो मुझसे ख़फ़ा लेकिन न मुझसे दूर जाओ तुम। गुज़ारी साथ हमने ज़िन्दगी वादे किये कितने,तुम्हारा फर्ज़ है अपने किये वादे निभाओ तुम। नहीं कोई गिला-शिकवा ज़ुबां पर अब तलक आया,हुई हो ग़र ख़ता कोई उसे अब भूल जाओ तुम। … Read more

खुद को समझाऊँ कैसे ?

अनिल कसेर ‘उजाला’ राजनांदगांव(छत्तीसगढ़)************************************ दर्द दिल का बताऊँ कैसे,रूठे यार को मनाऊँ कैसे। मोहब्बत हो गई है उनसे,एहसास ये दिलाऊँ कैसे। बिखर गए रिश्ते मोती से,माला एक बनाऊँ कैसे। तोड़ दिया दिल उसने जो,खुद को समझाऊँ कैसे। पेड़,सभी तुम काट रहे हो,मेघ कहे जल बरसाऊँ कैसे। झूठ से भरी इस दुनिया को,सच की राह दिखाऊँ कैसे। … Read more

वक़्त

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ वक़्त है बाक़ी जीवन सँवार लो अभी।अन्न के कंकर पानी से निथार लो अभी। जीवन का ताना-बाना अपने हाथ में नहीं,नाम लो रब का पाप को कटार दो अभी। सुखों का स्वागत करो सब मिलकर के,दुःखों को ख़ुदाया फ़ना ख़ार दो अभी। हसरतें पूरी करो आज ही सभी,ज़िन्दगी जीने को सार दो अभी। … Read more

दर्द का एहसास नहीं

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ जिस दिल में दर्द का एहसास नहीं।उसे अपने-पराये का आभास नहीं। न समाज न परिवार उसका होता,वो तन्हा है बज़्म उसके पास नहीं। जवानी में तन्हा मज़े कर लो तुम,जानो समय रहता हमेशा ख़ास नहीं। जो बिगड़ चुका बुरी लतों में फंसा हुआ,उसे तो सुख हमेशा के लिये रास नहीं। जो माँ-बाप की … Read more

नहीं सुधरता है आदमी

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ ठोकर लगी तो भी नहीं सुधरता है आदमी।सच कहने को भी तो मुकरता है आदमी। जो मुँह के सामने शहद जैसी बातें करते हैं,उनको ही अपना हितैषी मानता है आदमी। ऐसी बात करने वाले ज़हर बुझे तीर होते हैं,ऐसे तीरों को नहीं पहचानता है आदमी। आस्तीन में साँप नज़र तो नहीं आते मुझे,साथ … Read more

प्यार के किस्से

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश) ***************************************** प्यार के क़िस्से हमारे जिन ख़तों में क़ैद हैं।ख़त वो सारे अब हमारी फ़ाइलों में क़ैद हैं। बोलबाला जुर्म का है मुजरिमों की ‘भीड़ है,कौन कहता है के हम अपनी ह़दों में क़ैद हैं। भूख तारी,प्यास ग़ालिब,बेसरो सामां हैं हम।कितनी दुश्वारी से हम अपने दरों में क़ैद हैं। एक ख़ालिक़ ‘एक … Read more

मुश्किल हुई

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** हमसफर यूँ अब मेरी मुश्किल हुई।राह जब आसां हुई,मुश्किल हुई। हम तो मुश्किल में सुकूं से जी लिए,मुश्किलों को पर बड़ी मुश्किल हुयी। ख्वाब भी आसान कब थे देखने,आँख पर जब भी खुली,मुश्किल हुई। फिर अड़ा है शाम से जिद पे दीया,फिर हवाओं को बड़ी मुश्किल हुई। वो बसा है जिस्म … Read more