सहरा ‘को तू ‘दरिया लिख दे

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश)**************************** आशिक़ लिख ‘दे पगला लिख दे।लेकिन अपना शैदा ‘लिख दे। प्यार ‘का कोई रुक़्क़ा लिख दे।मैसेज हमको अच्छा ‘लिख दे। जैसा चाहे वैसा लिख दे।झूठे को तू सच्चा लिख दे। होने दे हैं तिश्ना लब हम,सहरा ‘को तू ‘दरिया लिख दे। पेपर ही तो भरना है बस,सच्चा-झूठा क़िस्सा ‘लिख दे। कौन … Read more

ख़्वाब मेरा सजाया होगा

अनिल कसेर ‘उजाला’ राजनांदगांव(छत्तीसगढ़)************************************ प्यार ने प्यार से समझाया होगा,दिल में तब मुझे बसाया होगा। नज़रें मिली होगी जब नज़रों से,ख़्वाब मेरा फिर सजाया होगा। जब-जब मेरी याद आई होगी,आँसूओं का सैलाब आया होगा। मिलन की बातें याद कर के सनम,तेरा दिल भी तो मुस्कुराया होगा। वादा जो तूने तोड़ा कोई गम नहीं,‘अनिल’ की कमी ने … Read more

मुहब्बत की निशानी…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरीकुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ******************************************** मुहब्बत की निशानी ढूँढता हूँ।वही अपनी जवानी ढूँढता हूँ। कभी ख़त तो कभी तस्वीर उसकी,सभी चीजें पुरानी ढूँढता हूँ। शहर में,गाँव में,सारे जहाँ में,छुपा चेहरा नूरानी ढूँढता हूँ। जो करता था मेरी रातें सुगंधित,वही मैं रातरानी ढूँढता हूँ। वही मैं ढूँढता हूँ प्यार उसका,वही बारिश का पानी ढूँढता हूँ। भले … Read more

बस प्यार होना चाहिये

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचना शिल्प:क़ाफ़िया-आर,रदीफ़-होना चाहिये; बहर-२१२२,२१२२,२१२२,२१२ दुश्मनी को छोड़कर बस प्यार होना चाहिये,जो बहुत होता है कम इस बार होना चाहिये। हर दफ़ा ले आड़ होली पर निकालें दुश्मनी,इस दफा कोई नहीं तकरार होना चाहिये। सत्य का अरु धर्म का पालन जहां होता रहे,आज ऐसा अपना ये संसार होना चाहिये। आपसी कटुता को … Read more

विश्वास रखना सीखिए

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* भूख से यदि जीतना उपवास रखना सीखिए।रोग मुक्ति के लिए विन्यास रखना सीखिए। राज में जिसका हवाला हाशिये पर भी नहीं,उस गरीबी का जरा परिभाष रखना सीखिए। लोक रंजन हो गया है आज धरना और बंद,आदमी की घुटन का संत्रास रखना सीखिए। बंद के सौ रोज बीते अब परीक्षा आपकी,खुद किसानी … Read more

इस क़दर क्यों सजा मिली ?

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ इस क़दर क्यों सबको सजा मिली है।अच्छी भली ज़िन्दगी को कजा मिली है। ये किस तूफ़ान की आहटें हो रही है,जो गर्मियों में सेहरा की हवा मिली है। धीरे-धीरे गुनाहों का बेइख़्तियार हो जाना,कब इन नामुरादों को वफ़ा मिली है। सच और झूठ का पता नहीं चल रहा है,राजा और प्रजा को कैसी … Read more

‘मर्यादा’ कहानी हो चुकी

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* सभ्यता के मापदंडों को चलो नीचे उतारें।नग्नता को अब नए श्रंगार शब्दों से पुकारें। जो फटे कपड़े पहनते मानते खुद को अगाड़ी,दिव्यतम है देह इनकी पूर्ण श्रद्धा से निहारें। तन प्रदर्शन हो गया है आजकल फैशन नशीला,देह इनकी है उसे वो जब जहां चाहें उघारें। वीरता की बात तो है चीथड़े … Read more

दिल का आईना रोशन करें

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश)**************************** इब्तिदा के साथ अपनी इन्तिहा रोशन करें।इल्मो ह़िकमत का अगर हम इक दिया रोशन करें। या ख़ुदा यह ही तमन्ना है हमारी हर घड़ी,वो शुआ़एँ दे जो दिल का आईना रोशन करें। आप ‘भी आ कर जला दीजे कभी कोई चराग़,हम कहाँ तक ख़ुद ही ‘अपना मक़बरा रोशन करें। जिस ‘तरफ़ … Read more

दीवानगी

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश)**************************** दीवानगी में हाय ये क्या कर चुके हैं हम।ख़ुद अपने दिल से आप दग़ा कर चुके हम। शर्तें लगा-लगा के रक़ीबों से आप के,करनी न थी जो,वो भी ख़ता कर चुके हैं हम। मन्ज़िल हमें मिले न मिले ‘ग़म नहीं मगर,रहबर ‘से अपनी राह जुदा कर ‘चुके हैं हम। इस ‘दिल … Read more

शिकार

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश)**************************** रोशनी में हुए तीरगी के शिकार।हम हुए फिर तिरी मुख़बिरी के शिकार। जो हुए हैं ‘तिरी बेरुख़ी के शिकार।हो गए लोग वो ‘ख़ुदकुशी के शिकार। दुश्मनों से न हारे जो जग में ‘कभी,वो हुए हैं ‘यहाँ दोस्ती के शिकार। उन ‘के अरमाँ न हो पाए पूरे ‘कभी,जो रहे मुस्तक़िल मुफ़लिसी के … Read more