सावन बरखा
डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** रचनाशिल्प:१४ मात्रा (४ ४ ४ २) सावन बरखा आई है।शीतल जल भर लाई है॥नभ में बादल छाए हैं।पानी भर कर लाए हैं॥ तड़-तड़ बिजली चमके है।सुनकर डर मन धड़के है॥भागे घर को बच्चे हैं।डर कर बैठे अंदर हैं॥ आहत हैं सब गर्मी में।मुदिता अब मन नरमी में॥बच्चे बूढ़े हरसाये।खुशियाँ सबके मन … Read more