नफ़रत की दीवार

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* नफ़रत की दीवार से, गिरा प्रेम का गेह।मन की कटुता छोड़कर, बरसाओ बस नेह॥ नफ़रत की दीवार अब मत रखन  परिवार।मिल-जुलकर सुख बाँटिए, प्रेम  रहे आधार॥ नफ़रत की दीवार जब, बढ़ती बारम्बार।क्षमा-दीपिका फिर जलें, मन का मिटे विकार॥ नफ़रत की दीवार को, प्रेम करे बेकार।मीठी वाणी से सदा, जीतो सबका प्यार॥ नफ़रत की दीवार बिन, जागे नव संसार।मानवता के फूल से, महके खुशी बयार॥ नफ़रत की दीवार से, टूटे सारे … Read more

राखी की महत्ता

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)*************************************** राखी में तो लाज है, जिसमें शामिल फर्ज।नहीं मानना है बुरा, निश्चित ही है हर्ज़॥ नेह भरा रिश्ता फले, बन जाता उपहार।राखी बँधती है जहाँ, वहाँ पले उजियार॥ ख़ूब कलाई धन्य है, हर्षित भ्राता-माथ।अक्षत करता वंदना, देता युग-युग साथ।। बहना ने भेजी दुआ, भाई है परदेश।शुभ-मंगल के भाव ने, हर डाला … Read more

रहा भरोसा अब नहीं

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)*************************************** सुख ने नित इतना छला, तन क्या मन पर घाव।तो भी अपनों पर नहीं, दिखता तनिक प्रभाव॥ पीड़ा के सब गीत हैं, मातम के उस्ताद।नहीं करे कोई यहाँ, उजड़े को आबाद॥ आँसू पीकर दिन कटा, बिलखी सारी रात।उसने जब मुँह फेरकर, करी न मुझसे बात॥ सबके मुखड़े दर्द के, बने हुए … Read more

हाथ डूबता थाम लो

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* डूब रहा जल में मनुज, सभी खड़े हैं मौन।खींचे मोबाईल छवि, उसे बचाए    कौन॥ देख रहे सब डूबते, मानवता    झकझोर।कहाँ दया करुणा मदद, तस्वीरें    चहुँ ओर॥ अपनाएँ हम दीनता, जीवन हैं अनमोल।परहित सेवा मनुजता, जीवन रक्षा   घोल॥ खड़ी भीड़ बस देखती, डूब रहे    इन्सान।प्राणों का रक्षण प्रथम, यही मनुज  पहचान॥ दृश्य बना कर क्या करें, बन दुख तारणहार।आज किसी … Read more

शिवजी का अंश मंगलमय आयाम

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)**************************************** नागपंचमी विशेष… नाग देव की वंदना, का जो दिवस महान।नागपंचमी नाम है, लें सब ही यह जान॥ नाग देव को पूजना, देता शुभ परिणाम।शिवजी का जो अंश है, मंगलमय आयाम॥ सावन का महिना फलित, शुक्ल पंचमी जान।पूजेगा जो नाग को, पायेगा वरदान॥ करो दूध अर्पित उसे, लो झुककर शुभ भाव।नाग नहीं … Read more

आजादी का पर्व-बलिदानों पर गर्व

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* आजादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)… पंद्रह अगस्त का दिवस, आजादी का पर्व।मातृ भूमि पर हो चुके, बलिदानों पर गर्व॥ भारत वसुधा के लिए, त्याग दिए सुख चैन।आजादी की राह में, लगे रहे दिन रैन॥ देशभक्ति की आन पर, छोड़ दिए घर द्वार।आजादी के यज्ञ में, आहुति को  तैयार॥ ऐसे … Read more

अमर रहे स्वाधीनता

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आजादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)…. अमर रहे स्वाधीनता, भारत अमर  तिरंग। संविधान भारत अमर, लोकतंत्र  सतरंग॥ नार्यशक्ति हो संबलित, युवाशक्ति  उत्थान। पर्यावरण हरितिम सुखद, भारतीय विज्ञान॥ हर्षित सुख वैभव कृषक, मानवता सम्मान।समरस बहु कौमी वतन, भारत चारु महान॥ आजादी की गूँज से, नया सबेरा  देश। बलिदानों के प्रति नमन, शान्ति … Read more

मित्र वही, जो गहे दूर तक हाथ

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)***************************************** ज़िंदगी का नाम दोस्ती… (मित्रता दिवस विशेष)…. मित्र वही जो संग रह, गहे दूर तक हाथ।हर मुश्किल से भिड़ सके, निभा सके नित साथ॥ कैसा भी हो वक़्त पर, भले सहे खुद पीर।आने मत दे मित्र के, नयनों में तो नीर॥ रोटी खाये बाँटकर गाये मंगल गीत।ढाढस साहस सौंपकर, मित्र सजाये … Read more

जनवादी कलमकार मुंशी प्रेमचंद

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** मर्म रचयिता (मुंशी प्रेमचंद विशेष)…. प्रेमचंद की लेखनी, जन-जन की आवाज़।सबकी पीड़ा के बने, जो उस युग में साज़॥ हर निर्धन की वेदना, बनी कलम का सार।प्रेमचंद की दिव्यता, बनी प्रखर उजियार॥ लिखीं कथाएँ अनगिनत, उपन्यास- सम्राट।प्रेमचंद जी उच्च थे, किया सृजन मेंं ठाठ॥ रंगभूमि उनने रचा, गबन और गोदान।प्रेमचंद की … Read more

राम-राम धुन मन में बसियो

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राम-राम धुन मन में बसियो, मोरे जीवन नाथ तिहारो जी।दीन अनाथ जनन के स्वामी, भवसागर सो उबारो जी॥ मन-मंदिर में दीप जलाओ, प्रेम-सुधा रसधार बहे।माया-मोह के घोर तिमिर को, ज्ञान-किरन से निखारो जी॥ सीता-राम बसो उर भीतर, पावन हो हर श्वास प्रभो।करुणा-कृपा की छाँव बिछाकर, जीवन-बाग सँवारो जी॥ शबरी-जैसी सरल प्रतीक्षा, हनुमत-सा विश्वास मिले।भरत-सरीखा भाव समर्पण, चरणों  में स्वीकारो … Read more