कान्हा
ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** हिय हरिणी मुख मोहना,हँसत बदन नँदलाल,गोपी गौओ सँग फिरे, गोकुल में गोपाल। करे खेल लीला रचे,धर मानव के रूप,परमब्रम्ह मानव बने,दानव राक्षस काल। बेणुतान ही अस्त्र है,शस्त्र रूप अनुरूप,मारे मोहक तान से,घायल बाल अबाल। अकुलाए वो अवतरित,देख धरनि के पीर,भीषण अत्याचार का,काटे-छांटे जाल। गीता का संदेश दे,करे अनुग्रह लोग,दिशा सुधारे देश को,जन-जन … Read more