गगन का चाँद

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************** शरद पूर्णिमा स्पर्धा विशेष….. करे गगन का चाँद भी,सभी को अमृत दान।शीतलता दे चंद्रमा,करे सभी रस पानll शरद पूर्णिमा में करें,राधा-कृष्णा रास।शरद पूर्णिमा में तभी,करें सभी विश्वासll रहे गगन का चाँद भी,आज धरा के पास।दूर गगन में चाँद से,बुझती सबकी प्यासll कहते हैं कोजागरी,इसे यहाँ कुछ लोग।श्वेत धवल सुन्दर … Read more

नयन नशीले

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)*********************************************** नयन नयन की जब हुई,आपस में टकरार।उठा ज्वार उर उदधि में,फूट पडे़ उद्गार॥ नयन नशीले मद भरे,लब ज्यों सुर्ख पलाश।कंचन काया पर चढ़ा,यौवन का मधुमास॥ नयन नयन में हो गई,पिय की पिय से बात।तन मन पुलकित हो उठा,मचल गये जज्बात॥ नयनों में उलझे नयन,उर खो बैठा होश।मचल उठे जज्बात फिर,यह यौवन … Read more

मानव हृदय उजास हो

आशा आजादकोरबा (छत्तीसगढ़) ********************************************** मानव हृदय उजास हो,होवे सुंदर काम। नेक कर्म अरु भाव से,मिलता जग में नामll बुरे कृत्य को छोड़ कर,लाएँ सुंदर भाव। मानवता की राह हो,कभी न हो ठहरावll पुलकित मन सबका करें,भर दे नव उल्लास। भारत का हर नागरिक,धरे आप विश्वासll नित्य उजाला ज्ञान का,जन-जन में संचार। मृदुवाणी बरसे सदा,सुंदर हो … Read more

सम्मान का मान

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************** शक्ति भक्ति में मान ले,मन से कर ले भक्ति।नवरात्रों के पर्व हैं,माँ दुर्गा दे शक्ति॥ माता में हर शक्ति है,करे दीन का मान।शक्ति बने माँ भक्त की,बने दीन का दान॥ नवरात्रों में लोग जो,करते हैं उपवास।रखती माँ हर भक्त में,खुद आकर के वास॥ बलशाली का बल बढ़े,बढ़े दीन का … Read more

मुस्कान

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************** जठरानल में अन्न हो,होंठों पर मुस्कान।सबके तन पर हो वसन,सबके पास मकानll धन वैभव सुख इज्जतें,सबको सदा नसीब।सभी बने शिक्षित सबल,सोचे नव तरकीबll सर्व समाज नित प्रगति हो,खुशियाँ मिले अपार।दीन हीन अरु पददलित,हो जीवन उद्धारll न्याय व्यवस्था आम जन,मानक शिक्षा नीति।ऊँच नीच दुर्भाव मन,मिटे मिलें सब प्रीतिll जाति धर्म … Read more

विजयादशमी पर्व है अहंकार की हार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) **************************************************** विजयादशमी पर्व है,अहंकार की हार।नीति,सत्य अरु धर्म से,पलता है उजियारll मर्यादा का आचरण,करे विजय-उदघोष।कितना भी सामर्थ्य पर,खोना ना तुम होशll लंकापति मद में भरा,करता था अभिमान।तभी हुआ सम्पूर्ण कुल,का देखो अवसानll विजयादशमी पर्व नित,देता यह संदेश।विनत भाव से जो रहे,उसका सारा देशll निज गरिमा को त्यागकर,रावण बना असंत।इसीलिए असमय हुआ,उस … Read more

माँ सबकी रक्षा करो

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* आई संकट की घड़ी,कर संकट से पार।जग कल्याणी माँ करूँ,विनती बारंबार॥ ज्योत जले जगमग सदा,माँ तेरे दरबार।हे माता जगदंबिके,गुण गाए संसार॥ सुमिरन तेरा मैं करुं,कर पूजा दिन रात।‘कोरोना’ अब नाश हो,अंबे मेरी मात॥ विनती तेरी हम करें,दे दें माँ आशीष।दूर हटे विपदा सभी,झुका रहे ये शीश॥ राक्षस का संहार कर,है कोरोना नाम।देवी … Read more

नवदुर्गा रूप

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) *************************************************** प्रथम रूप माँ शक्ति का,शैलपुत्रि है नाम।हेमसुता माँ अम्ब है,रूप बड़ा अभिराम॥ हे मात ब्रह्मचारिणी,संकट से कर पार।रूप दूसरा शक्ति का,कर सबका उद्धार॥ न्यारा ही ये रूप है,चंद्रघंट है नाम।रूप तीसरा मात का,लोकोत्तर अभिराम॥ आदिशक्ति प्रभायुक्ता,चौथा दुर्गा रूप।माँ कूष्मांडा नाम है,इनकी शक्ति अनूप॥ मात भवानी शैलजा,पंचम माँ का रूप।कार्तिकेय की मात … Read more

इठलाते लखि वेदना

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ****************************************************** इठलाते लखि वेदना,खल सम्वेदनहीन।झूठ लूट धोखाधड़ी,धनी विहँसते दीन॥ लावारिस क्षुधार्त मन,देख फैलते हाथ।आश हृदय कुछ मिल सके,कोई बने तो नाथ॥ आज मरी लखि वेदना,दीन दलित अवसाद।दया धर्म करुणा कहाँ,ख़ुद होते आबाद॥ मरी सभी इन्सानियत,मरा सभी ईमान।हेर-फेर कर लाश में,नहीं कोई पहचान॥ देह वसन आवास बिन,रैन बसेरा रात।बंज़ारन की जिंदगी,शीत … Read more

नहीं सृष्टि का मान

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************** नदिया घट-घट में फिरे।सागर तट तक जाय॥प्यास बुझाए जीव की।जो भी लेता जाय॥ व्याकुल सागर हो गया।लहरें रहा उछाल॥नदियां बेचारी सभी।सूख रहीं बेहाल॥ प्राणी सब बेहाल हैं।दूषित है जलवायु॥जीना दूभर हो गया।चैन बिना हर आयु॥ बचपन बूढ़ा हो गया।बूढ़े हैं बेजान॥जीवन की साँसें घटी।नहीं सृष्टि का मान॥ मिटते जाते … Read more