मधुरिम हो सम्बन्ध
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *********************************************** मधुरिम रिश्ते नित सुखद,हैं जीवन वरदान।अति कोमल नाजुक सतत,निर्भर नित सम्मान॥ निर्भर हो रिश्ते मधुर,त्याग शील परमार्थ।लघुतर जीवन तब सफल,रिश्ते हो बिन स्वार्थ॥ घर-बाहर समाज हो,चाहे देश-विदेश।आपस के व्यवहार पर,रहते रिश्ते शेष॥ रिश्ते हैं अनमोल धन,मधुरामृत उपहार।सखा सहोदर पूत सम,जीवन का आधार॥ नीति-रीति नित प्रीति पथ,रिश्ते चले अघात।सरल सहज … Read more