सोच सदा जग स्वस्ति की

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************ जय सुधीर गंभीर नर,उद्यमशील विनीत।सफल कीर्ति अनमोल धन,निशिचन्द्र मधुप्रीत॥ अर्थ बने सम्बन्ध के,अपनापन विश्वास।साथ खड़े सुख त्रासदी,हो रिश्ते आभास॥ बँटे सहोदर स्वार्थ में,भूले सब दायित्व।लखि हर्षित दुखार्त में,खोए गुण अस्तित्व॥ साथ खड़े जो मीत हो,त्यागमूर्ति परमार्थ।सौ जीवन उस प्रीत दूँ,सखा कृष्ण सम पार्थ॥ सोच सदा जग स्वस्ति की,साधुचित्त समुदार।सचमुच … Read more

अपना प्यारा गाँव

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)*********************************************** भुला न पाएंगे कभी,वट की शीतल छाँव।हर लेता ‘शिव’ पीर सब,अपना प्यारा गाँव॥ ‘शिव’ बैलों की घंटियाँ,सघन पेड़ की छाँव।याद बहुत आता मुझे,बचपन वाला गाँव॥ हुए प्रदूषित अब शहर,नित्य चलें ‘शिव’ दाँव।मन को आनन्दित करे,अपना प्यारा गाँव॥ पक्षी नित कलरव करें,नहीं सियासी दाँव।पहले जैसा आज भी,लगता अपना गाँव॥ कोयल अब गाती … Read more

अलग-अलग दो दीप

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)*********************************************** गांधी जयंती विशेष….. दो अक्तूबर को जले,अलग-अलग दो दीप।कृषक मसीहा एक ‘शिव’,दूजा सत्य प्रदीप॥ लाल बहादुर लाल सा,नहीं जगत में लाल।समरसता अरु सादगी,उनकी बनी मिसाल॥ ‘गाँधी’ ‘शास्त्री’ ने किया,सभी दिलों पर राज।जन्म जयंती पर उन्हें,करता नमन समाज॥ सत्य अहिंसा न्याय का,फैलाया सन्देश।बापू के आदर्श से,नतमस्तक है देश॥ देशभक्ति अरु सादगी,की ‘शिव’ … Read more

गाँधी थे आलोक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ***************************************************** गांधी जयंती विशेष……………. शील त्याग गुण कर्म का,मानक था जो लोक।सत्य अहिंसा सारथी,गाँधी थे आलोक॥ सहज सरल नित सादगी,मृदुभाषी सद्नीति।शान्ति दूत अतुलित प्रखर,संकल्पित सद्प्रीति॥ निर्मल मन निर्भय सबल,निर्विकार व्यक्तित्व।क्रान्तवीर रणबाँकुरा,बापू का अस्तित्व॥ धीर-वीर अति साहसी,यायावर संघर्ष।दीन-हीन पीड़ित दलित,चाहत था उत्कर्ष॥ जिद्दी था सिद्धान्त का,शोक नहीं उपहास।राम राज्य मन कामना,मानवता … Read more

बिन बेटी सब सून

प्रियंका सौरभहिसार(हरियाणा) ********************************************************** जीवन में आनंद का,बेटी मंतर मूल।इसे गर्भ में मारकर,कर ना देना भूल॥ बेटी कम मत आंकिये,गहरे इसके अर्थ।कहीं लगे बेटी बिना,तुझे सृष्टि व्यर्थ॥ बेटी होती प्रेम की,सागर सदा अथाह।मूरत होती मात की,इसको मिले पनाह॥ छोटी-मोटी बात को,कभी न देती तूल।हर रिश्ते को मानती,बेटी करें न भूल॥ बेटी माँ का रूप है,मन ज्यों … Read more

बापू से सीखो सभी

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ******************************************************* महात्मा गांधी जयन्ती विशेष….. बापू से सीखो सभी,सत्य-अहिंसा सार।जीवनभर करते रहे,सबसे सद्व्यवहारll सादा जीवन रहा सदा,सुख-सुविधा से दूर।रखते उच्च विचार थे,किया न कभी गुरूरll गांधी एक विचार है,सबकी करे सहाय।प्रासंगिक है आज भी,सबके मन को भायll आजादी थी खून में,थी दृढ़ इच्छा शक्ति।रग-रग में जिनके भरी,मातृभूमि की भक्तिll जन्मा पावन भूमि … Read more

कृपा निधान

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)*********************************************************** आँखों में छवि आपकी,हे प्रभु कृपा निधान।दुख-भंजन दुख टारिये,हम बालक नादानll कृष्ण बजाये बाँसुरी,मुख पर सुन्दर साज।मधुवन नाचे राधिका,गोपिन की सरताजll भोली-भाली राधिका,कृष्ण प्रेम बँध आय।मधुबन घूमे संग में,मंद-मंद मुस्कायll मोहन की छवि चित्त में,रख अपने वो पास।पिया-पिया रटने लगी,राधा हुई उदासll श्यामल मोहन रूप तो,राधा गोरी रंग।रास रचा ब्रजधाम … Read more

सब खोकर होती विजय

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ********************************************************* मुदित मना सब हो मुदित,खिले अधर मुस्कान।कौन कहे कब हो यहाँ,लघु जीवन अवसान॥ जीवन समझो युद्ध है,दो अपना अवदान।पाप पुण्य कुरुक्षेत्र में,सत्य सदा बलवान॥ करें प्रशंसा लोग जग,रखो न मन अभिलास।तौल तुला हृदयस्थली,हो सुकर्म आभास॥ लोभ मोह मद स्वार्थ में,आप्लावित जग लोग।कौन किसे अपना कहे,निरत क्षणिक सुखभोग॥ परहित जीवन … Read more

हिन्दी है अभिमान

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’ बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़)*************************************************** हिन्दी बिन्दी देश की,और यही पहचान।तन-मन में मेरे बसी,हिन्दी है अभिमान॥ हिन्दी जो बोले सखा,वह भारत का लाल।परिपाटी रक्षित किये,रहता बनकर ढाल॥ मुख में हिन्दी का रहे,जब पावन परिधान।निज भारत की है यही,गरिमामय पहचान॥ दक्षिण की पा सभ्यता,स्वयं लगाकर रोग।निज हिंदी को भूलकर,इठलाते क्यों लोग॥ ‘कोहिनूर’ नित हिन्द का करो मान … Read more

सचमुच में थे प्रखर

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************************** काव्य-चेतना के धनी,किया सृजित साहित्य।सचमुच में तुम थे प्रखर,चमके बन आदित्य॥ कविताओं में जोश था,भरी प्रबल हुंकार।हर कृति में उत्कृष्टता,नीति,मूल्य से प्यार॥ युग को रोशन कर दिया,बनकर के वरदान।इसीलिए तो लेखनी,ने पाया सम्मान॥ हर रचना में था भरा,ओज और आवेग।देशभक्ति मुखरित हुई,वंदनीय संवेग॥ कालजयी साहित्य रच,फैलाया आलोक।हर रचना ने कर … Read more