त्याग, तप और तेज का पर्याय ‘वीर सावरकर’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* विनायक दामोदर सावरकर, जिन्हें आदरपूर्वक ‘वीर सावरकर’ कहा जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन अग्रदूतों में थे; जिनकी लेखनी और कर्म दोनों में अदम्य राष्ट्रप्रेम धधकता था। उनका जन्म २८ मई १८८३ को महाराष्ट्र के भगूर ग्राम में हुआ। बाल्यावस्था से ही उनमें स्वाधीनता की ज्वाला प्रज्वलित थी। … Read more

शिक्षा में न्यायपालिकाःसंवाद की जरूरत है, विवाद की नहीं

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** एक बार फिर शिक्षा से जुड़ा एक प्रश्न राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है। शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा प्रकाशित आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक, वाले अध्याय में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मुकदमों का उल्लेख … Read more

वैवाहिक समारोह में बढ़ता दिखावा नुकसानदायी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ भारतीय संस्कृति में विवाह एक पवित्र, अटूट और आध्यात्मिक संस्कार है, जो २ आत्माओं और परिवारों को सात जन्मों के लिए जोड़ता है। विवाह में अग्नि को साक्षी मान कर सप्तपदी और सात वचन ही विवाह की स्थिरता का मुख्य स्तंभ होता है, जो वर-वधू को जीवनभर साथ निभाने का वादा कराते … Read more

‘मुफ्त रेवड़ी’ पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी बड़ी चेतावनी

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** भारतीय लोकतंत्र की विडम्बना यह है कि चुनाव आते ही जनसेवा का स्वरूप बदलकर जनलुभावन राजनीति में परिवर्तित हो जाता है। राजनीतिक दलों ने मुफ्त की योजनाओं को चुनावी सफलता का छोटा रास्ता बना लिया है। मतदाताओं को तात्कालिक आर्थिक लाभ देकर मत हासिल करने की प्रवृत्ति लगातार मजबूत हो रही है। … Read more

जीवन में सामंजस्य की महत्ता समझिए

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हम सामाजिक प्राणी हैं और समाज का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। यदि जीवन में सफल होना और खुशी से भरपूर जीवन जीना चाहते हैं, तो हमें एक-दूसरे से सामंजस्य बनाकर चलना बहुत जरूरी है। फिर चाहे वह हमारा कार्यस्थल हो अथवा घर परिवार, अन्य सम्बन्धी या आस-पड़ोस। संयुक्त परिवार हो … Read more

भारत की नई डिजिटल नीति की असली परीक्षा

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** डिजिटल मीडिया का युग मूलतः ‘गति’ का युग है-खबरें सेकंडों में फैलती हैं, प्रतिक्रियाएँ मिनटों में बनती हैं, और जनमत कई बार घंटे भर में दिशा बदल लेता है। इसी तेज़ रफ्तार के बीच अब एक नई शक्ति निर्णायक बनकर उभरी है-कृत्रिम मेधा के सहारे बनी सामग्री, खासकर ‘डीपफेक’ और सिंथेटिक … Read more

भारत की सामाजिक चेतना पर बढ़ता संकट ‘आर्थिक असमानता’

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** भारत विविधता में एकता का संदेश देने वाला देश है, लेकिन यही देश वर्तमान में आर्थिक असमानता जैसी चुनौती से जूझ रहा है जो सामाजिक न्याय, अवसरों की बराबरी और समावेशी विकास को चुनौती दे रही है। ‘विश्व असमानता रिपोर्ट २०२६’ के ताज़ा निष्कर्षों के अनुसार भारत में संपत्ति और आय … Read more

बंगाल:भविष्य धर्म की लहर या प्रगति की राह ?

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, पर राजनीतिक रणभेरी बज चुकी है। इस बार संकेत साफ हैं-चुनाव विकास बनाम विकास के दावे पर नहीं, बल्कि पहचान, अस्मिता और धर्म की ध्वजा के इर्द-गिर्द घूम सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर … Read more

शाकाहारी भोजन ही श्रेष्ठ

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ शाकाहारी भोजन हमारे शरीर की मूलभूत आवश्यकता है। स्वस्थ शरीर के लिए शाकाहारी भोजन अमृत के समान है। आज विश्व में बढ़ते अत्याचार, मार-काट, हिंसा की इस एक लहर-सी चल पड़ी है, वहीं मनुष्य में दया, प्रेम, मानवता के खत्म होने का मुख्य कारण मांसाहार और मदिरापान है। भारतीय संस्कृति … Read more

उम्र को हावी न होने दें

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ आजकल अनेक महिलाएं अपने घर की दहलीज पार कर नौकरी या व्यवसाय में व्यस्त हैं, परंतु अभी भी बहुत-सी महिलाओं की बड़ी आबादी ऐसी है, जो गृहिणी कहलाती है। यह सुबह से रात तक घरेलू कामों में लगी रहती हैं। झाड़ू पोंछा, बर्तन, खाना आदि कामों में व्यस्त रहने के कारण उन्हें … Read more