सुख-शांति के लिए लें संकल्प

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… २०२५ बीत गया…। कैलेण्डर बदल जाता है, साथ में हर दिन कुछ खट्टी-मीठी यादों को देकर जाता है… क्योंकि कालचक्र तो अनवरत् गतिमान रहता है….वर्ष २०२६ का आगमन हो चुका है… नववर्ष अपने साथ बहुत सारी उम्मीदें और सपने लेकर आता है, इसी लिए … Read more

अवसर है अनुत्तरित सवालों से ईमानदारी से जूझने का

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… एक और वर्ष इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। वर्ष २०२५ केवल कैलेंडर का एक अंक नहीं था, बल्कि वह घटनाओं, चेतावनियों, उपलब्धियों और विडंबनाओं का ऐसा संगम रहा, जिसने समाज, राजनीति और विकास की हमारी समूची अवधारणाओं को कठघरे में खड़ा … Read more

संवेदनशीलता नहीं, अब दिखावा

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* कितनी अजीब बात है न… कि दु:ख प्रदर्शित करने के लिए सच्ची संवेदना नहीं, आपकी उपस्थिति आवश्यक है… भले ही जीते जी आपने किसी रिश्तेदार को कभी वक्त न दिया हो…, कभी फोन पर हालचाल न पूछा हो…, कभी कोई जरूरी मदद न की हो, किंतु… किसी व्यक्ति के दुनिया से … Read more

प्रतिदिन हो संकल्प का अभिनंदन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)…. नववर्ष का स्वागत हम प्रायः एक तिथि, एक रात, कुछ शुभकामनाओं और उत्सवों तक सीमित कर देते हैं, परंतु क्या परिवर्तन सचमुच केवल कैलेंडर के पलटने से होता है ? वास्तविक नववर्ष तब जन्म लेता है, जब हमारी चेतना हर श्वांस … Read more

कुरीतियों के जाल में वर्तमान युग

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* विकास के शीर्ष पर खड़े होकर जब नज़र घुमाती हूँ तो चमचमाते अनेक प्रशंसनीय पायदानों के नीचे कहीं, अंधेरी… कालिख पुती हुई कुरीतियाँ दृष्टिगोचर होती है। कुछ तो इतनी अविश्वसनीय और हेय होती है कि, आज की उपलब्धियों, सफलताओं पर यक़ीन करना, प्रसन्न होना मुश्किल हो जाता है। मन इतना उचट … Read more

अरावली:अस्तित्व की लड़ाई

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** अरावली पर्वत श्रृंखला की नई परिभाषा को लेकर उठा विवाद अब जन-आन्दोलन का रूप ले रहा है। इसी के अन्तर्गत अरावली बचाओ की चिन्ता-यह केवल भावनात्मक आह्वान नहीं, बल्कि भारत के पर्यावरणीय भविष्य की जीवनरेखा है। गुजरात से लेकर दिल्ली तक फैली अरावली पर्वतमाला पृथ्वी की प्राचीनतम पर्वत श्रृंखलाओं में से एक … Read more

२ महीने की छुट्टियों में ऐसा करें…

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** विद्यालयों में गर्मियों में २ महीने की छुट्टियाँ होती हैं। बच्चे बड़े खुश होते हैं, कि अब पढ़ाई से छुटकारा मिलेगा। सवेरे देर तक सोएंगे, आराम से नहाएंगे, खाएंगे और सारा दिन टी.वी. देखेंगे। माताएं परेशान कि अब छुट्टियों में बच्चों की धमा-चौकड़ी और चीख पुकार से उन्हें कैसे निजात मिलेगी। कुछ … Read more

भारत की पारंपरिक चिकित्सा की रोशनी में विश्व-स्वास्थ्य

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** आज की दुनिया गहन और बहुआयामी स्वास्थ्य संकटों से गुजर रही है। एक ओर जीवन-शैली से जुड़ी बीमारियाँ, मानसिक तनाव, अवसाद, चिंता और असंतुलन तेजी से बढ़ रहे हैं, तो दूसरी ओर संक्रामक रोग, महामारी व पर्यावरणीय विषमताएँ मानव जीवन को निरंतर चुनौती दे रही हैं। इन परिस्थितियों के बीच यह स्पष्ट … Read more

उपभोक्ता शोषण राष्ट्र की सामूहिक चेतना पर आघात

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस (२४ दिसम्बर) विशेष…. ‘राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस’ केवल उपभोक्ताओं से जुड़ी तारीख मात्र नहीं है, बल्कि यह उस मौलिक सत्य की स्मृति है कि किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था, सामाजिक संतुलन और नैतिक स्वास्थ्य का केंद्र बिंदु उपभोक्ता ही होता है। उपभोक्ता वह व्यक्ति है, जो अपने परिश्रम की कमाई … Read more

अमीरी की जीवन-शैली से गरीब की त्रासदी

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आज जिस घातक पर्यावरण संकट से गुजर रही है, वह केवल एक शहर की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है। विडम्बना यह है कि इस संकट के नाम पर जो तात्कालिक उपाय लागू किए जाते हैं, उनका सबसे बड़ा खामियाजा वही तबका भुगतता है, … Read more