मेहनत का फल
ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’अलवर(राजस्थान)*********************************************** ‘अजी सुनते हो, राहुल को स्कूल छोड़ने नहीं जाना है क्या। हमेशा गुमसुम बैठे रहते हो। कब तक कोसते रहोगे अपनी किस्मत को। अब नौकरी नहीं लगी तो कोई बात नहीं। कोई अच्छा सा काम धन्धा ढूंढ लो, ताकि बच्चों का गुजारा हो सके।’ कल्पना ने बड़ा दुःख जताते हुए कहा।विवेक अनमना-सा … Read more