बस अच्छे इंसान बनो

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** अच्छे इंसान बनो,बस विद्वान बनो। कभी ना लड़ना,बस आगे बढ़ना। होना खूब सफल,तभी सुनहरा कल। सबको उम्मीद तुमसे,गिरना ना डगर से। तुम्हीं भविष्य कल का,अच्छे काम करना सदा। बुराई नहीं अपनाना,लक्ष्य में ध्यान लगाना। बस ऐसे गुणवान बनो,हर मन का मान बनो। सच बोलो, साथ निभाओ,कभी दिल मत दुखाओ। मीठे बोलों … Read more

बेचैनी क्यों…?

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* बेचैनी क्यों है इतनी,जब हर समस्या का हल है। आज परेशान हो जितना,उतनी ही खुशियाँ कल है। सुख-दुःख है आना-जाना,यही सत्य अटल है। चिंताओं में गुम ना होना,मन आवारा बादल है। लुत्फ़ उठाओ जीवन का हर पल,यही संपत्ति अचल है॥

समाज मौन है और मैं भी…

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आपाधापी मृगतृष्णा का, भागमभागी अविरत पथ है।किसकी चिन्ता किसको चिन्ता मौन आज सामाजिक मठ हैजान और पहचान वृथा सब,है अपनापन रिश्तों का गम,कहाँ सत्य अब ग्रास झूठ देख मौन मैं भी चुप नम है। अभिलाषा अभिलेख बना अब राष्ट्र धर्म बस स्वप्निल हैमातृभूमि तिरोहन निर्भीत लाज कोख रक्षण दुर्बल … Read more

जेठ दुपहर सताए

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** उफ़ ! जेठ दुपहर तड़पाए,लगे ज्यों यह दहक-दहकाएतपती धूप ज़िया तड़पाए,ज़िया बेचैन हलक सुखाए। दुपहर बेदर्द पौन छुपाए,रूह, अटक हुलार तरसाएरूठीं ज्यों, विरहिणी दुखियाए,जेठ दोपहरी तन-मन हलसाए। है मेघपुष्प हाहाकारी l,कहीं छाया लिए तकरारीकहीं बिजली लिए ललकारी,अन्य सफ़र व भारी दुश्वारी। भीषण लौ दावानल देखो,स्वार्थी मनुज क्या है जाने ?सर्वस्व … Read more

आओ करें योग

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* योग दिवस विशेष…. सब अपने तन-मन से दूर करें रोग,आओ करें योगसंजीवनी है यह सेहत की,रखे सबको निरोग।आओ करें योग… प्राणायाम स्वस्थ मन का प्राण,स्वस्थ शरीर के लिए व्यायामआष्टांग योग का नियम अपनाकर,जीवन को बनाएं विशेष।आओ करें योग… भारत की प्राचीन परम्परा से,योग है स्वास्थ्य का आधारधीरे-धीरे सारी दुनिया,ने इसको अपनाया।आओ करें … Read more

प्रकृति कितनी सुंदर

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** प्रकृति कितनी सुंदर,खुशबूदार फूलसुंदर सजीले फल,हरियाली की चादर बिछीझरने की जैसे खिलखिलाती आवाज। कोयल की कूक,तैरते कमलतितलियाँ भौंरे संग खेलती,पहाड़ों पर जाती पगडंडियाँशीतल हवा,पीपल के नीचे चौपालमंदिर की घण्टी की ध्वनि,लोकगीतों की मधुर आवाजमन मोह लेती है। शाम को गोधूलि बेला,गाय के गले में बंधी घण्टीमानों आरती हो रही हो प्रकृति … Read more

तू मेरा सारथी बन जा

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* तू मेरा सारथी बन जा, इसी दुनिया में कदम धरूँगी।नेहा की मुझ पर बारिश कर दे, तेरा अनुसरण करूँगी॥ अथाह ज्ञान का सम्मिश्रण कर दो, जीवन नैया पार हो,विषयों से भरी इस दुनिया में, ज़िंदगी का सार हो।कभी भटकना कभी फिसलना, पर मैं तेरा स्तंभ बनूँगी,तू मेरा सारथी बन जा, … Read more

पहली वर्षा

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** है अषाढ़ की पहली वर्षा,रंग कुछ बदला हुआखुल के बरसी हैं घटाएं,मन मगन पुलकित हुआ। गरज कर बादल जो बरसे,मच गया एक शोर-साघर से बच्चे निकल बाहर,नृत्य करते मोर-सा। पहली बारिश का है अपना,कुछ मज़ा एक अलग साख़ुशबू मिट्टी की जो आती,सुखद अनुभव शरद-सा। पहली बारिश में ही सड़कें,भर गईं तालाब जैसी।आगे … Read more

ज़िंदगी खूबसूरत है…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* तुम सच ढूंढते हो…जीवन भर झूठ के घड़े भरकर। तुम शांति खोजते हो…अपने बगल में हथियार धरकर। तुम प्यार ढूंढते हो…मन में द्वेष और घृणा रखकर। तुम ज्ञान ढूंढते हो…किताबों को ताक पर रखकर। तुम अपनापन खोजते हो…स्वार्थी दानव बनकर। तुम रूप रंग ढूंढते हो…इस काया पर मुखौटा ओढ़कर। तुम इंसानियत … Read more

अंधेरे से उजाले तक

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** कभी मन के अंधेरे से,उजाले तक सफर किया है ?क्या कभी आपने अपने,विचारों को जीया है ?जरा उतरिए मन की,गहराइयों के धुंधलकों मेंदेखिए ईश्वर ने क्या,किस्मत बख्शी है…खो जाइए अंधेरों की,गर्त में इस तरहकि टिमटिमाने लगें ‘विचार’सितारों की तरह…फिर देखिए एक ‘विचार’,क्या कर सकता है-अंधेरों को उजालों मेंबदल सकता है,‘विचार’ की … Read more