बरसात ही तो है…
संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* बरसात ही तो है जो भिगो देती है,तन मन और धन भीगर्मी की तपिश से झुलसे हुए तन,एक हल्की बौछार की चाह मेंतड़पते रहते हैं इंतज़ार करते हैं,बरसात का, बरसात ही तो हैशीतल कर देती है तन को…। अशांत मन ढूँढता रहता है,शांति की तलाश में भटकता हैशहर से गाँव, गाँव … Read more