साहित्य
डरपोक दुश्मन, बरसा गए गोलियाँ
अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** ‘पहलगाम’,असहाय निर्दोषआतंकी हमला किया,कायरता-बुजदिलीचीख। ‘पहलगाम’,था अमनआँखों में सुकून,स्वर्ग कश्मीरबर्बरता। ‘पहलगाम’,क्या किया ?आतंकी अमन चुभा,इंसानियत हत्यारेअमानवीयता। ‘पहलगाम’,डरपोक दुश्मनबरसा गए गोलियाँ,करो सामनासेना। ‘पहलगाम’,लड़ो सामनेआओ मैदान में,दिखाएंगे वीरतामौत। ‘पहलगाम’,आतंकवाद-हिंसाअरे छोड़ दो,क्या हासिल ?बर्बादी। ‘पहलगाम’,इंसानियत शर्मसारसैलानियों पर वार,उजड़ा सिंदूरजीवन। ‘पहलगाम’,कब तकऐसे हमले सहेंगे ?चुप रहेंगे ?कत्लेआम। ‘पहलगाम’,आतंकी घटनाअमन-चैन दुश्मनी,रोयी वादियाँसंसार। ‘पहलगाम’,नदियाँ दुखीबही खून धारा,रोए पहाड़हैवानियत। … Read more
मन की पीड़ा
जी.एल. जैनजबलपुर (मप्र)************************************* शब्द हैं रूके-रूके,नैन हैं ठगे-ठगेअतिथि सभी छले गए,नाम धर्म का, मौत दे गए। सर झुके-झुके,कदम नहीं रूकेबीबी रोई, बच्चे भी रोए,नाम धर्म का, मौत दे गए। पर्वत भी चीखों से पिघल गए,कश्मीर से रोजी-रोटी लूट गए।चंद जयचंद फिर मिल गए,नाम धर्म का, मौत दे गए॥
पुस्तक सामर्थ्यवान बनाए
सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (‘विश्व पुस्तक दिवस’ विशेष)… पुस्तक सामर्थ्यवान बनाए,पुस्तक आशावान बनाएआन-बान-सम्मान दिलाए,सच्ची सखी, जीना सिखाएअंत:सह बाह्य स्थिति सुझाए। पुस्तक सामर्थ्यवान बनाए,पुस्तक आदर्शवादी बनाएराह दिखा विवेकी बनाए,श्रेष्ठ, सार्थक जीवन बनाएराग, द्वेष, घृणा, दर्प मिटाए। पुस्तक सामर्थ्यवान बनाए,लगाएं प्रीत, मीत बनाएंरिष, चिंता, निराशा भगाएं,हमदर्दी, हमराही बनाएंलौकिक मोह-माया भुलाएं। पुस्तक सामर्थ्यवान … Read more
प्रभु से मिलन को चाहिए ‘पुस्तक से दोस्ती’
विजयलक्ष्मी विभा प्रयागराज (उत्तरप्रदेश)************************************ क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (‘विश्व पुस्तक दिवस’ विशेष)…. भौतिक जगत में वांछ्य है,‘मेहनत’ से दोस्ती,प्रभु से मिलन को चाहिए,‘पुस्तक से दोस्ती। मेहनत ने दिखाया हमें, संसार का वैभव,ऊँची हवेलियों में हो, आराम का अनुभवचाहे जहां उड़ जाते हैं, पंछी की तरह हम,मेहनत ने दिखाया हमें, इंसान में यह दमफिर भी जरूरी जग … Read more
मेरी अच्छी दोस्त पुस्तकें
डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (‘विश्व पुस्तक दिवस’ विशेष)… पुस्तकों तुम इतिहास हो,पुस्तकों तुम वर्तमान होपुस्तकों तुम भविष्य हो,पुस्तकों तुम अच्छी दोस्त होपुस्तकों तुममें सजे हुए हैं,अनगिनत शब्दों के भंडार। आदिकाल की सत्यता हो,आदिकाल की लय-छंद होआदिकाल की हो कहानियाँ,पुरातन का विज्ञान होबीते कल का सम्मान हो। मानव भावों की स्थितियाँ,जीवन … Read more
किताबें बेहतरीन दोस्त
डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (‘विश्व पुस्तक दिवस’ विशेष)… किताबें बोलती हैं,कितने राज़ खोलती हैं। किताबें सुनती हैं,हमारी कहानियाँ कहती हैं। किताबें ज्ञान का समंदर है,उस भवसागर में गोता लगाने से मोती मिलता है। किताबें मनोरंजन भी है,हर पन्ने का स्वाद लेना आना चाहिए। किताबें शौक भी है, शान भी,व्यक्तित्व का परिचायक … Read more
मछलियाँ सच्ची मित्र
संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** नदियाँ कहती हैंकल-कल की कहानियाँरहगुजर की प्यास बुझाती,मछलियों को भला नींद कहाँ आती!मछलियाँ भी नदियों का ख्याल रखती,साफ-सुथरा रखतीमछलियाँ ही तो सच्ची मित्र हैं नदियों की। नाव की पतवार संगहोड़ करती,कोई दाना डालता तो खा लेतीमगर किसी से मांगती नहीं,वो चाहती भी नहींबिना मेहनत के खाना। वो प्रदूषित होने से नदी … Read more
मृत्यु का नर्तन
सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** गहराता ही जा रहा हैयह ख़ूनी उन्माद,कब तक चलेगा यहनिर्मम आतंकवाद ? रह-रह कर डसने कोसिर उठाते हैं,कितनों के प्राण येविषधर लिए जाते हैं। चुन-चुन कर हिन्दुओं कोअपना निशाना बनाया है,इन दहशतगर्दों नेकपड़ा तक उतरवाया है। ख़ुशहाली कश्मीर कीइनसे देखी नहीं जाती,पहलगाम की हरियालीइनको पसंद नहीं आती। निर्मम हत्या का बन रहाषड्यंत्री … Read more
गुरु-गुरुकुल परम्परा
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* गुरु गुरुकुल की परम्परा, गरिमा गुणी गुरुत्व।गुणातीत गुरु ब्रह्म सम, अखिलानंद महत्व॥ मर्यादित जन आचरण, परम्परा कुल शान।संस्कार कौशिक समझ, स्वाभिमान सम्मान॥ परम्परा रक्षण प्रथम, राष्ट्र धर्म कर्त्तव्य।सदाचार संस्कृति सुपथ, गमनागम ध्यातव्य॥ मातृशक्ति आदर सतत, परम्परा इस देश।करुणा ममता सृष्टिजा, रीति प्रीति परिवेश॥ मातु पिता गुरु अतिथि का, देवतुल्य … Read more