पर्यावरण का नुकसान
हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** मेरी रूह रोती है कांप-कांप कर,देख के पर्यावरण का नुकसानचिन्ता लगी है मन में इक भरी कि,हो न जाए कहीं यह धरती श्मशान। दया आती है तेरी करनी पर,तू कर क्या रहा है ओ इंसान ?सृष्टि रचाने वाले से डर जरा,तू क्यों बना है खुद भगवान… ? नदियाँ नाला हो रही … Read more