हिम्मत रख

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** तिमिर से लड़ो ओज मिलेगा,आज नहीं, कभी तो मिलेगासाहस, डगरें, हार मिलेगी,रख धैर्य, विध्न दूर मिलेगा। दीपक बुझा, जल धैर्य देखा,हौसले सहित अंधड़ देखाकपट हँसी जगत में देखी।बढ़ा हौसला, उत्कर्ष देखा। देख मकड़ी, का अथक प्रयास,सिंहर उठी निरन्तर प्रयासनिज लक्ष्य, कैसे पहुंचेगी ?औंधे गिर शून्य, सहमेगी। फिसल कर उठती धर … Read more

जीवन तेरे बिना अधूरा

सौ. निशा बुधे झा ‘निशामन’जयपुर (राजस्थान)*********************************************** कल-कल करती धारा,बहे देखो! ये धाराधरा पर इसका मतलब क्या,शीतल, तन और कंठ को तृप्त करे। झर-झर बहती धारा,हिमालय से कन्याकुमारी तकभिन्न-भिन्न निकले धारा,इसको कहते ‘सहस्त्रधारा।’ टप-टप बूँदों का शोर,तेज हवा और तेरा रूप।जीवन है बिना तेरे अधूरा,स्वर-ध्वनि में अस्तित्व है तेरा॥

ध्यान धरो राधारमण

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राधे राधे भज मनुज, कृष्णायन अविराम।ध्यान धरो राधारमण, भज लो राधेश्याम॥ मन विकार तम मन मिटे, राधे राधे नाम।अन्तर्मन नवशक्ति दे, माधव मन अभिराम॥ राधे सुमिरन भोर में, मिले शान्ति सुख योग।खिले कृष्ण मकरंद मन, मिटे स्वार्थ तम रोग॥ राधामय हिय भक्ति रस, राधे राधे गान।मुख मुकुन्द मुकुलित मधुर, … Read more

सूखी नदियों की गुहार

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** सूरज की तपन,झुलसा रही धरती कोनदिया सूखी,पत्थर झाँक रहे नदियों सेआते-जाते लोगों के पग को,निशान बनपगडंडी कहलाने लगे। बादल गुहार कर रहे,हवा सेहमें नदियों का करना है श्रृंगार,बरस जानाउन्हीं नदी के पावन जल से,करेंगे जल अभिषेकऔर सूर्य को देंगे अर्घ्य। प्रार्थना करेंगे,नदियों को सूखा न रखे-भर दे पेट नदियों का पानी … Read more

खोयी सजनी सपनों में

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* खोयी-खोयी रात यौवना,चंद्रहास मुस्कान हृदय मेंरजनीगन्धा बनकर महकी,निशिकांत गुलज़ार चमन में। सप्तसिन्धु के ख्वाब गगन में,आश पास शशि मधुर मिलन मनसच्चाई शशि चंद्रिका प्रीत लखि,टूटी नींद रात सपने में। खोयी सजनी शशि सपनों में,आलोकित चन्द्रप्रिया बाँहों मेंआलिंगन आभास मिलन सुख,धवल प्रीत वर्षण ख्वाबों में। देख सजन परप्रेम प्रिया में,असहनीय … Read more

प्राण है ‘पीपल’

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** पीपल फिर गीत गाने लगे हैं,फिजाओं के मीत होने लगे हैंएक सरगम-सी भरी पीपलों पर,पीपल अब गुनगुनाने लगे हैं। ये चैत की लू भरी हवाएँ,पत्ती-पत्तियाँ छूने लगी हैसर-सराकर पीपल की देह पर,प्रकृति का गीत गाने लगी है क्या चिलचिलाती धूप है,क्या झिलमिलाता रूप हैजंगल-जंगल, गाँव-गाँव में,छाए जो पीपल जैसे नृप हैं। … Read more

नव आव्हान

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* नव वर्ष है,क्या हर्ष हैनव चेतना,नव कल्पना। नव फसलें,नव अन्न हैनव भोज्य,नव परिधान हैं। नव आव्हान,नव गीत मेंनव रचना,नव रूप में। नव सृजन के,नव चित्र में।नव चिंतननव उड़ान है॥ परिचय- शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राध्यापक (अंग्रेजी) के रूप में कार्यरत डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती वर्तमान में छतीसगढ़ राज्य के बिलासपुर में निवासरत … Read more

पानी सदा अनमोल

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* नीर सदा अनमोल,समझें इसी का मोलजीवन का ये आधार,व्यर्थ न बहाइए॥ सूख गए नदी ताल,जीव सभी हैं बेहालअपने ही पाँवों पे न,कुल्हाड़ी चलाइए॥ कट रहे वृक्ष सभी,समय बचा है अभी,पर्यावरण सुरक्षा,सभी अपनाइए॥ प्रकृति से छेड़छाड़,करें नहीं मार-धाड़,प्राकृतिक जीवन को,जीवन्त बनाइए॥ बिना पानी सूना सब,बचेगा न कुछ अब,गलती सुधारें नर,इसी में … Read more

दिल… जब निचोड़ा जाता होगा

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* दिल का सारा दर्द जब निचोड़ा जाता होगा,क्या कागज़ भी दर्द से तड़प उठता होगा ? शिकायतों का पुलिंदा जब धरा जाता होगा,दिल सिकुड़ के कितना दब जाता होगा ? वफा-ए-मोहब्बत का तराना छेड़ा जाता होगा,क्या नाजुक-सा दिल धक-धक धड़कता होगा ? आखिर कितने ग़म रोज़ ही सहता होगा,फूल-सा कोमल दिल … Read more

वृक्ष की व्यथा

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* पौधा बोला-मुझे लगाओवृक्ष ने कहा-मुझे बचाओ। डाली रुदन स्वर में झुक करबोली-मुझे मत काटोपत्ते करुणा से लिपट कर,जाहिर किए-मुझे मत तोड़ो। फूल कहे माली से-मुझे खिलने दो, खिलखिलाने दोफल पेड़ों पर लद गए,उस पर पत्थर मत मारो। जब हम और आप समझ,जाएंगे वृक्ष की ये व्यथा कथागर अब नहीं कर सके,वृक्ष … Read more