करनी पड़ेगी चिंता

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** ‘विश्व पृथ्वी दिवस (२२ अप्रैल)’ विशेष… ‘पृथ्वी’,अनमोल तत्वकरनी पड़ेगी चिंता,वरना संकटजीवन। ‘पृथ्वी’,बचाना हैजल, जंगल, जमीन,जीवन कीमतीसमझो। ‘पृथ्वी’,तत्व घटेंगेजीव-जंतु तड़पेंगें,साँस छूटेगीमौत। ‘पृथ्वी’,जागरूकता जरूरी‘विश्व पृथ्वी दिवस’,पिघलती बर्फजागो। ‘पृथ्वी’,संकट गहराया‘ओजोन’ परत छेद,भयंकर तूफान,‘सुनामी।’ ‘पृथ्वी’,प्रकृति कीमतीसमस्या हुई विकराल,मनुष्य जिम्मेदारभविष्य। ‘पृथ्वी’,दर्जा ‘माँ’करते रोज प्रदूषित,जलवायु संकटअस्तित्व। ‘पृथ्वी’,सुन्दर जीवनआकाश-जल-अग्नि,दुरूपयोग क्यों ?चिंतन। ‘पृथ्वी’,मिटेगा पानीबस जीवन ‘कहानी’,विलुप्त हवायमराज। ‘पृथ्वी’,स्वार्थ छोड़ोसहज-सरल … Read more

पुस्तकें कल्पवृक्ष और कामधेनु, प्रेरणा लें

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)…. ‘विश्व पुस्तक दिवस’ जिसे ‘विश्व पुस्तक प्रतिलिपि दिवस’ भी कहा जाता है, पुस्तक-संस्कृति को बल देने और पढ़ने की प्रवृत्ति के आनंद को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाने वाला विश्व उत्सव है। हर साल २३ अप्रैल को दुनियाभर में पुस्तकों के दायरे को … Read more

किताबें ही मन को पढ़ती

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)…. किताबें ही सबसे अच्छी दोस्त,जीवन भर साथ देतीबच्चों से लेकर बुजुर्गों की हमदर्द,लिखे मन के भाव कोपढ़ता है जब मनतब मन तृप्त हो जाता। किताबें कभी बूढ़ी नहीं होती,जब सड़कों पर बिकती रद्दी मेंतब मन व्यथित हो उठता,ऐसा लगता है किघर के बुजुर्ग … Read more

इश्क़ करना खता थी

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** नासमझ बेअदब, बेवफा, आदमी,खुद को भी अब समझता है खुदा आदमी। ज़िंदगी बर्बाद कर डाली है उसने प्यार में,बारहा पैरों से जमीं छीन लेता आदमी। बेवफाई का तेरी शिकवा भला कैसे करूँ,पाक मोहब्बत की भी तौहीन करता आदमी। इश्क़ करना क्या खता थी कोई बतलाए मुझे,वादा करके क्यूँ हो गया … Read more

पृथ्वी माँ करुणामयी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ विशेष… हरित भरित सुष्मित प्रकृति चारु,नद गिरि निर्झर सिन्धु समझ लोपशु विहंग धरती भरी पड़ी,अनल अनिल नभ बन्धु समझ लो। नवांकुरित नवपौध धरा चहुँ,नवकिसलय नवपात समझ लोकुसमित सुरभित हो फलित वृक्ष,निर्मल बहता वात समझ लो। झील नील सागर विमल सलिल,विलसित भू आकाश समझ लोनवजीवन संचार धरा … Read more

ये कौन-सी प्रगति…

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** साबरमती जब तुम स्व-भ्रमती थी, कैसी विहरति चलती थीयाद करो इतिहास को अपने, किन, कैसे मोड़ों पर ढलती थी। निश्चित तुम्हें याद आता होगा,कैसे स्वर्णिम पलों में पलती थीअरावली से आखातों तक, सरसराती और बल खाती चलती थी। अरावली के उदयमान सूरज की बेटी,अतीत तुम्हारा बड़ा स्वर्णिमजल का तुम्हारा बिंदु-बिंदु था, … Read more

कभी कश्मीर, कभी बंगाल…

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** कि कभी कश्मीर जलता है, कभी बंगाल जलता है,शायद, अब मेरा देश बस ऐसे ही चलता है। हमारा घर मत जलाओ, बेघर हो जाएंगे,हर घर में इक बेशुमार सपना पलता है। कि क्या रखा है इस जमीन के लालच में,आज तेरा है, कल किसी और का, बड़ा खलता है। जिसे समझा … Read more

हिम्मत रख

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** तिमिर से लड़ो ओज मिलेगा,आज नहीं, कभी तो मिलेगासाहस, डगरें, हार मिलेगी,रख धैर्य, विध्न दूर मिलेगा। दीपक बुझा, जल धैर्य देखा,हौसले सहित अंधड़ देखाकपट हँसी जगत में देखी।बढ़ा हौसला, उत्कर्ष देखा। देख मकड़ी, का अथक प्रयास,सिंहर उठी निरन्तर प्रयासनिज लक्ष्य, कैसे पहुंचेगी ?औंधे गिर शून्य, सहमेगी। फिसल कर उठती धर … Read more

जीवन तेरे बिना अधूरा

सौ. निशा बुधे झा ‘निशामन’जयपुर (राजस्थान)*********************************************** कल-कल करती धारा,बहे देखो! ये धाराधरा पर इसका मतलब क्या,शीतल, तन और कंठ को तृप्त करे। झर-झर बहती धारा,हिमालय से कन्याकुमारी तकभिन्न-भिन्न निकले धारा,इसको कहते ‘सहस्त्रधारा।’ टप-टप बूँदों का शोर,तेज हवा और तेरा रूप।जीवन है बिना तेरे अधूरा,स्वर-ध्वनि में अस्तित्व है तेरा॥

ध्यान धरो राधारमण

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राधे राधे भज मनुज, कृष्णायन अविराम।ध्यान धरो राधारमण, भज लो राधेश्याम॥ मन विकार तम मन मिटे, राधे राधे नाम।अन्तर्मन नवशक्ति दे, माधव मन अभिराम॥ राधे सुमिरन भोर में, मिले शान्ति सुख योग।खिले कृष्ण मकरंद मन, मिटे स्वार्थ तम रोग॥ राधामय हिय भक्ति रस, राधे राधे गान।मुख मुकुन्द मुकुलित मधुर, … Read more